

Biraul News: एक बच्चे के मन का डर और पिता की डांट का खौफ… बस इतनी सी बात ने ऐसी चिंगारी सुलगाई कि पूरा पुलिस महकमा ‘हाई-वोल्टेज’ मोड में आ गया। हत्या की अफवाहों के बीच जब सच सामने आया तो सबने सिर पकड़ लिया। दरअसल, बिरौल थाना क्षेत्र के बलिया गांव से लापता जिस नाबालिग को पुलिस हत्या की आशंका में खोज रही थी, वह अपने दादा के गांव लदहो के एक स्कूल में कक्षा में बैठकर पढ़ाई करता हुआ मिला।
Biraul News: खून के धब्बों ने कैसे फैलाई हत्या की सनसनी
कहानी शुरू हुई अविनाश कुमार झा के लापता होने से। जब गांव के खेतों में दो अलग-अलग जगहों पर खून के धब्बे मिले, तो पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। बात आग की तरह फैली कि अविनाश की हत्या कर शव को गायब कर दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक जगुनाथ रेड्डी जला रेड्डी के निर्देश पर स्थानीय पुलिस के साथ फॉरेंसिक और डॉग स्क्वायड की टीम भी बिरौल पहुंच गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी के नेतृत्व में थानाध्यक्ष चंद्र मणि और उनकी टीम ने अकबरपुर बेक-बलिया मुख्य सड़क के किनारे खेतों, खलिहानों और छोटकी नदी में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया। पुलिस हर एंगल से जांच कर रही थी और हत्या की अफवाह ने प्रशासन पर भारी दबाव बना दिया था। इसी बीच, पुलिस को एक ऐसी सूचना मिली जिसने जांच की दिशा ही बदल दी।
पिता की डांट का डर और स्कूल में छिपने की पूरी कहानी
पुलिस को खबर मिली कि लापता अविनाश लदहो गांव के एक स्कूल में देखा गया है। थानाध्यक्ष चंद्र मणि तुरंत टीम के साथ लदहो पहुंचे और अविनाश को स्कूल से सुरक्षित बरामद कर लिया। पूछताछ में अविनाश ने जो बताया, वह हैरान करने वाला था। उसने बताया कि शुक्रवार शाम वह गेहूं पिसाने चक्की पर गया था, लेकिन खेलने में देर हो गई। उसे पिता की डांट का डर सताने लगा।
इसी डर के कारण वह घर वापस नहीं गया और रात भर लदहो गांव के स्कूल में ही छिपा रहा। सुबह जब स्कूल खुला, तो वह चुपचाप पांचवीं कक्षा में जाकर बैठ गया और पढ़ाई करने लगा। स्कूल के प्रधानाध्यापक ने जब एक नए बच्चे को कक्षा में देखा तो उन्हें शक हुआ। उन्होंने तुरंत पंचायत के मुखिया को सूचना दी, जिसके बाद खबर पुलिस और परिजनों तक पहुंची। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। पुलिस जांच में यह भी पता चला कि अविनाश ने पहले भी एक बार पिता की डांट के डर से घर छोड़ दिया था और दो दिन बाद लौटा था। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
पुलिस और परिजनों ने ली राहत की सांस
जब तक अविनाश नहीं मिला था, पुलिस के हाथ-पैर फूले हुए थे। खून के धब्बों ने पुलिस को भी यकीन दिला दिया था कि शायद बच्चे की हत्या कर शव को कहीं फेंक दिया गया है। जिस जगह धब्बे मिले थे, उसे पुलिस ने पीली पट्टी से घेरकर घटनास्थल बना दिया था। सैकड़ों की संख्या में लोग जमा हो गए थे, मानो कोई बहुत बड़ी घटना हो गई हो।
लेकिन अविनाश के सकुशल मिलने की खबर आते ही सबने राहत की सांस ली। पुलिस ने बच्चे की काउंसलिंग करने के बाद उसे पीआर बॉन्ड पर पिता को सौंप दिया है। यह भी जानकारी मिली कि अविनाश अपनी मां के निधन के बाद बलिया में अपने फूफा-फूफी के यहां पिता के साथ रहता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि कैसे एक छोटी सी बात और डर बड़ी अफवाहों को जन्म दे सकता है।




