Child Marriage Prevention: बिरौल दरभंगा देशज टाइम्स। समाज की जड़ों में गहराई तक पैठी एक ऐसी कुरीति, जो न जाने कितनी जिंदगियों को समय से पहले ही मुरझा देती है। लेकिन अब इस ‘अदृश्य कारागार’ की दीवारों को तोड़ने के लिए जमीनी स्तर पर प्रयास तेज हो गए हैं। इसी कड़ी में, बिरौल अनुमंडलीय अस्पताल में आशा कार्यकर्ताओं को बाल विवाह के दुष्प्रभावों के बारे में गहन प्रशिक्षण दिया गया, ताकि वे अपने क्षेत्र में जागरूकता की मशाल जला सकें।
Child Marriage Prevention: प्रशिक्षण का उद्देश्य और प्रभाव
बिरौल। समाज में बाल विवाह एक गंभीर समस्या है, जिसके दूरगामी नकारात्मक परिणाम सामने आते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, शनिवार को अनुमंडलीय अस्पताल में आशा कार्यकर्ताओं के लिए एक विशेष प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य आशा कार्यकर्ताओं को बाल विवाह से होने वाले दुष्परिणामों के बारे में विस्तृत जानकारी देना और उन्हें इस सामाजिक बुराई को रोकने के लिए सशक्त करना था।
प्रशिक्षक बीसीएम बिनोद कुमार ने इस दौरान बाल विवाह के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार कम उम्र में विवाह लड़कियों की शिक्षा को बाधित करता है और उनके शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा आघात पहुँचाता है। बिनोद कुमार ने आशा कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रूप से जागरूकता अभियान चलाएं और लोगों को बाल विवाह के घातक परिणामों से अवगत कराएं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने न केवल कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे, बल्कि अपने अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि वे अपने कार्यक्षेत्र में बाल विवाह की रोकथाम के लिए प्रतिबद्ध हैं और लोगों को इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का हर संभव प्रयास करेंगी। बालिकाओं का स्वास्थ्य इस प्रकार के सामाजिक बदलाव से ही सुनिश्चित किया जा सकता है।
इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित आशा कार्यकर्ताओं की संख्या काफी अधिक थी, जिसके कारण कई कार्यकर्ताओं को खड़े होकर भी प्रशिक्षण लेना पड़ा। यह उनकी लगन और सीखने की उत्सुकता को दर्शाता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
सीएचसी प्रभारी भगवान लाल दास, हेल्थ मैनेजर रवि भूषण, और आशा कार्यकर्ता आरती कुमारी, निभा, सरिता, भारती सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं ने इस प्रशिक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाई। यह सामुहिक प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सामुदायिक जागरूकता की अहम भूमिका
आशा कार्यकर्ताओं को ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य और सामाजिक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। उनके माध्यम से दी गई जानकारी और जागरूकता से ही बाल विवाह जैसी कुरीतियों पर लगाम लगाई जा सकती है। यह प्रशिक्षण न केवल उन्हें जानकारी से लैस करेगा, बल्कि उन्हें समाज में एक प्रभावी बदलाव लाने वाले एजेंट के रूप में भी सशक्त करेगा। इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम बालिकाओं का स्वास्थ्य और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।






