



Birol News: ज्ञान की गंगा जहां आठ दशकों से अविरल बह रही है, उस ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान ने एक बार फिर अपनी गौरवगाथा लिखी। बिरौल के प्लस टू उच्च विद्यालय सुपौल बाज़ार में मंगलवार को विद्यालय का 87वाँ स्थापना दिवस बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। वर्ष 1939 में स्थापित इस ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान ने आठ दशक से अधिक समय में क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था को एक मजबूत नींव प्रदान की है। समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि गौड़ा बौराम विधायक सुजीत कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। बच्चों द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित अतिथियों का दिल जीत लिया। मंच पर बच्चों की प्रतिभा और उत्साह देखकर देर तक तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रही। यह विद्यालय स्थापना दिवस क्षेत्र के शैक्षिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव को दर्शाता है।
Birol News: 87 वर्ष की गौरवशाली यात्रा और सम्मान समारोह
विद्यालय स्थापना के अवसर पर उन परिवारों के प्रतिनिधियों को विशेष सम्मान दिया गया, जिन्होंने 5 जनवरी 1939 को विद्यालय निर्माण के लिए अपनी भूमि दान कर क्षेत्र में शिक्षा की मशाल प्रज्ज्वलित की थी। विद्यालय के इतिहास से जुड़े इन परिवारों के योगदान को याद करते हुए कार्यक्रम स्थल पर एक भावनात्मक माहौल देखने को मिला। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कार्यक्रम में शिक्षा क्षेत्र में योगदान देने वाले कई शिक्षकों और गणमान्य लोगों को भी सम्मानित किया गया। सुनील कुमार मेमोरियल फाउंडेशन की ओर से घोषणा की गई कि प्लस टू ओंकार उच्च विद्यालय के साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स के शिक्षकों को ‘अजीत मेमोरियल अवार्ड’ के अंतर्गत 11,000 रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। यह सम्मान उन शिक्षकों को दिया जाएगा जिनके विषय के विद्यार्थी सर्वश्रेष्ठ परिणाम हासिल करेंगे।
शिक्षा के प्रति जागरूकता और बेटियों की बढ़ती भागीदारी
मुख्य अतिथि सुजीत कुमार ने अपने संबोधन में छात्रों को शिक्षा के प्रति जागरूक और सतर्क रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आज शिक्षा का स्तर सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विश्वभर में ऊंचाइयों को छू रहा है। अपने ऐतिहासिक संदर्भों के साथ उन्होंने बताया कि विद्यालय की स्थापना 5 जनवरी 1939 को हुई थी और उसी वर्ष 1 सितंबर 1939 को जर्मनी द्वारा पोलैंड पर आक्रमण के साथ द्वितीय विश्वयुद्ध का आरंभ हुआ था। उन्होंने कहा कि जब दुनिया हथियारों की होड़ में उलझ रही थी, तब बिरौल की धरती पर शिक्षा की नींव रखी जा रही थी। यह विद्यालय स्थापना दिवस इस बात का प्रतीक है कि ज्ञान का प्रकाश विपरीत परिस्थितियों में भी फैलता रहा। उन्होंने यह भी कहा कि— “कोई भी विद्यालय सिर्फ भवन से नहीं चलता, बल्कि उसकी आत्मा होती है। स्कूल का अनुशासन, मूल्य और शिक्षक-विद्यार्थी का समन्वय ही उसे उत्कृष्ट बनाता है।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।समारोह में बच्चियों की बड़ी संख्या में मौजूदगी को देखते हुए विधायक ने कहा कि बेटियाँ आगे बढ़ रही हैं, और यही किसी भी समाज की प्रगति का आधार है। उन्होंने कहा कि जब बालिकाएँ शिक्षा के क्षेत्र में तेज़ी से आगे आती हैं, तो समाज स्वयं सशक्त एवं विकसित हो जाता है। पूरे समारोह में शिक्षकों, अभिभावकों तथा छात्रों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। विद्यालय परिसर उत्सव के रंगों से सजा हुआ था और वातावरण में गौरव एवं उत्साह का संचार दिखाई दिया। मौके पर एचएम डॉ फिरोज आलम, समाजसेवी गणेश झा, राज कुमार सिंह, अजय बिरौलिया, राम बाबू महथा, श्याम महथा समेत अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।




