



Biroul News: जिंदगी की किताब में कुछ पन्ने ऐसे भी होते हैं, जिन पर स्याही नहीं, आंसू टपकते हैं। एक ऐसी ही हृदय विदारक कहानी सामने आई है, जहां एक परिवार के सपने बिखर गए। बिरौल थाना क्षेत्र के बलरा-सोनपुर के बीच मिले एक अज्ञात शव की पहचान आखिरकार हो गई है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी।
बिरौल न्यूज: सोशल मीडिया बना मददगार, घंटों बाद हुई शव की शिनाख्त
बलरा-सोनपुर के बीच मिले इस शव ने शुरुआत में पुलिस और स्थानीय लोगों को असमंजस में डाल दिया था। कई घंटों की मशक्कत के बाद, जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, खासकर फेसबुक और व्हाट्सएप पर प्रशासन और जागरूक नागरिकों द्वारा शव की तस्वीरें साझा की गईं, तब जाकर मृतक की पहचान संभव हो पाई। इस दुखद प्रकरण में शव की पहचान एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। जैसे ही मोबाइल पर आई तस्वीरों को परिजनों को दिखाया गया, उनके बीच कोहराम मच गया। चीख-पुकार और बिलखने की आवाजों से पूरा माहौल गमगीन हो गया। मृतक के परिजन तुरंत बिरौल थाना पहुंचे और पुलिस को अपनी आपबीती सुनाई।
मृतक की पत्नी कंचन देवी और मां मुन्नी देवी ने पुलिस को बताया कि राजेंद्र मल्लिक (32), स्वर्गीय योगेश्वर मल्लिक के पुत्र, 6 जनवरी की सुबह मजदूरी करने घर से निकले थे। देर शाम तक जब वे घर नहीं लौटे, तो परिवार वालों ने उनकी काफी खोजबीन की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कंचन देवी ने बताया कि उनके पति राजेंद्र कभी-कभी नशापान करते थे और मजदूरी के लिए घर से निकलने के बाद दो-तीन दिन बाद लौट आते थे। उन्हें इस तरह की किसी अनहोनी की आशंका बिल्कुल नहीं थी। उन्हें क्या पता था कि जिस पति के घर लौटने का वे इंतजार कर रही थीं, वह उन्हें हमेशा के लिए छोड़कर जा चुका है। यह कहते-कहते वह फफक कर रो पड़ीं और उनकी आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। मां मुन्नी देवी का भी रो-रोकर बुरा हाल था।
राजेंद्र अपने छह भाइयों में मंझले थे। अपने पीछे वे मां, पत्नी और तीन छोटी-छोटी पुत्रियों को छोड़ गए हैं। सबसे बड़ी बेटी चार साल की है, दूसरी ढाई साल की और तीसरी सिर्फ एक साल की गोद में है। इस घटना से पूरे परिवार में मातम छा गया है। परिजन अभी भी सदमे में हैं और उन्हें विश्वास नहीं हो रहा कि यह सब सच हो गया है। इस दुखद घड़ी में पूरा गांव उनके साथ खड़ा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
परिजनों का दर्द और भविष्य की चिंता
इस घटना ने एक बार फिर स्थानीय प्रशासन के लिए कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, सोशल मीडिया के जरिए शव की पहचान होना एक सकारात्मक पहलू है, लेकिन ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और संचार व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। मृतक के परिवार के सामने अब आर्थिक और भावनात्मक, दोनों तरह की चुनौतियां खड़ी हैं। तीन छोटी बेटियों और पत्नी का भविष्य अब अधर में लटक गया है। स्थानीय प्रशासन और समाज से उम्मीद है कि वे इस पीड़ित परिवार की हर संभव मदद करेंगे ताकि वे इस कठिन समय से उबर सकें। बिरौल पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है ताकि मौत के कारणों का पता लगाया जा सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




