
Drug De-addiction: नशे की लत एक ऐसा दलदल है, जो न सिर्फ व्यक्ति को निगलता है बल्कि पूरे परिवार और समाज को भी अपनी चपेट में ले लेता है। इसी गंभीर समस्या से निजात पाने और एक स्वस्थ समाज की नींव रखने के लिए बिरौल में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है।
Drug De-addiction: नशे की ज़ंजीरें तोड़कर नया सवेरा: बिरौल में ‘नशा मुक्त भारत’ अभियान की गूंज
Drug De-addiction: समाज निर्माण में युवाओं की भागीदारी
बिरौल, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के विशेष निर्देश पर, स्वामी विवेकानंद जी के जन्मदिवस यानी राष्ट्रीय युवा दिवस के शुभ अवसर पर न्यायालय परिसर में ‘नशा मुक्त भारत’ अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज को नशे के घातक प्रभावों से अवगत कराना और एक स्वस्थ एवं सुरक्षित भविष्य की ओर प्रेरित करना था।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी नरेश महतो ने की, जिन्होंने अपने संबोधन में नशे के किसी भी रूप के सेवन को स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशे का दुष्प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे परिवार और समाज को बुरी तरह प्रभावित करता है। अक्सर, कई आपराधिक घटनाओं के पीछे भी नशे की लत एक बड़ा कारण होती है। उन्होंने ग्रामीण स्तर पर नशे के दुष्परिणामों पर विस्तार से चर्चा की और लोगों से अपील की कि वे इस संदेश को जन-जन तक पहुंचाएं, ताकि स्वच्छ, स्वस्थ और सभ्य समाज का निर्माण संभव हो सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
कानूनी सहायता और पुनर्वास: एक उम्मीद की किरण
अधिवक्ता संघ के सचिव राजकपूर पाण्डेय ने इस अवसर पर भारत को नशामुक्त बनाने के लिए नालसा की विशेष ‘डॉन’ स्कीम (NALSA DON Scheme) के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत नशा पीड़ितों और उनके परिजनों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसके साथ ही, पीड़ितों के राहत और पुनर्वास के लिए भी यह स्कीम सक्रिय रूप से कार्य करती है, ताकि वे सामान्य जीवन में लौट सकें। कानूनी सहायता के माध्यम से, पीड़ितों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाता है और उन्हें समाज की मुख्यधारा में फिर से शामिल होने में मदद मिलती है।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी भागीदारों ने एकजुट होकर “से यस टू लाइफ, नो टू ड्रग्स” (जीवन को हां कहो, नशे को ना) के नारे को दोहराया, जो नशे के खिलाफ उनकी सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस अवसर पर पैनल अधिवक्तागण नूर अली खान, शंकर जी झा, कुमार रजनीश, संतोष कुमार सिंह, अधिवक्ता रफीक आलम और पीएलवी ओमप्रकाश सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस प्रकार के जागरूकता अभियान समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और युवा पीढ़ी को नशे के अंधकार से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







