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दिसम्बर, 15, 2025

Bodh Gaya एशियन कांग्रेस का आगाज़: डॉ. नीलम मोहन बोलीं- भारत कुपोषण और डायबिटीज के दोराहे पर, बच्चों को सिर्फ ‘लाइव’ नहीं ‘थ्राइव’ कराना है

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प्रभास रंजन, बोधगया | बोधगया में आईएपी के कम्यूनिटी पेडियाट्रिक्स के प्रथम एशियन कांग्रेस का आगाज़ हुआ। सम्मेलन के पहले दिन देशभर के शिशु रोग विशेषज्ञों ने बच्चों के कुपोषण, मोटापा, और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर चिंता जताई और बेहतर पोषण को बच्चों के विकास की कुंजी बताया।

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भारत एक चौराहे पर: डॉ. नीलम मोहन

आईएपी प्रेसिडेंट इलेक्ट डॉ. नीलम मोहन ने कहा —

“भारत आज उस मोड़ पर खड़ा है, जहां कुपोषण और संक्रमण के साथ-साथ लाइफस्टाइल डिजीज जैसे मोटापा, डायबिटीज और हाइपरटेंशन बढ़ रहे हैं। विज्ञान ने मृत्यु दर को तो घटाया है, लेकिन अब हमें बच्चों को सिर्फ जीवित रखना नहीं, बल्कि उन्नति की ओर ले जाना (Thrive) सुनिश्चित करना है।”

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उन्होंने कहा कि हर विजिट पर ग्रोथ चार्ट भरना आवश्यक है ताकि शिशुओं के विकास की समय पर निगरानी हो सके।
डॉ. मोहन ने बताया कि शिशु के इलाज के दौरान केवल रोग नहीं, बल्कि उसकी सभी संभावित कमियों का निदान किया जाना चाहिए।

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“हर बच्चे को मिले ईश्वर प्रदत्त क्षमता तक पहुँचने का अवसर”

डॉ. नीलम मोहन ने अपने संबोधन में कहा कि शिशु रोग विशेषज्ञों की जिम्मेदारी सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं, बल्कि बच्चों को उनकी पूर्ण क्षमता तक पहुँचाने में मदद करना भी है। ज्ञात हो कि डॉ. मोहन ने अब तक भारत में सबसे अधिक लीवर ट्रांसप्लांट किए हैं।

‘आदर्श पेरेंटिंग’ पर बोले डॉ. उदय बौद्धंकर

आईएपी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. उदय बौद्धंकर ने कहा कि बच्चों के विकास में अनुवांशिक कारकों के साथ-साथ पेरेंटिंग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा —

“माता-पिता को बच्चे के साथ पहले अभिभावक, फिर रोल मॉडल, और उसके बाद मित्र बनकर जुड़ना चाहिए। बच्चों की बातें सुनना और उन्हें सम्मान देना उनके आदर्श विकास की कुंजी है।”

बढ़ता मोटापा और नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज पर चिंता

डॉ. निगम प्रकाश नारायण ने बच्चों में मोटापे की बढ़ती समस्या पर चेताया, वहीं डॉ. यशवंत पाटिल ने नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज (NCDs) के खतरों और बचाव पर जोर दिया।

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उन्होंने कहा कि बदलती खानपान आदतें और निष्क्रिय जीवनशैली बच्चों के स्वास्थ्य के लिए चुनौती बनती जा रही हैं।

‘हिडन हंगर’ पर बोले डॉ. ए.के. जायसवाल

डॉ. ए.के. जायसवाल ने बताया कि माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी — जैसे विटामिन A, जिंक और आयरन की कमी — बच्चों के विकास में बाधक हैं।

उन्होंने कहा, “हमें पोषण सुरक्षा को नीतिगत प्राथमिकता बनाना होगा ताकि बच्चे मजबूत और स्वस्थ बन सकें।”

प्रदूषण से बच्चों का स्वास्थ्य खतरे में

जयपुर से आए डॉ. आलोक गुप्ता ने कहा कि प्रदूषण बच्चों के फेफड़ों और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है। उन्होंने जोर दिया कि “यह समय है जब हमें स्वच्छ वायु और स्वस्थ पर्यावरण को बच्चों के अधिकार की तरह देखना चाहिए।”

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कई वरिष्ठ चिकित्सक रहे मौजूद

सम्मेलन में डॉ. के.पी. साराभाई, राकेश कुमार, अनूप वर्मा, अरुण कुमार अग्रवाल, विनोद कुमार सिंह, चंदन कुमार सिंह, राजनीति प्रसाद सहित देशभर के नामचीन चिकित्सक शामिल हुए।

विभिन्न सत्रों की अध्यक्षता डॉ. के.एन. मिश्रा, ओम प्रकाश, एस.ए. कृष्णा, शीला सिन्हा, भूपेंद्र कुमार, रश्मि अग्रवाल, अनिल तिवारी, सत्येंद्र शंकर और नीलम वर्मा ने की।

मुख्य बातें संक्षेप में:

  • भारत में बढ़ती लाइफस्टाइल डिजीज पर चिंता।

  • हर बच्चे के लिए ग्रोथ चार्ट अनिवार्य करने की सिफारिश।

  • हिडन हंगर और माइक्रोन्यूट्रिएंट कमी पर चेतावनी।

  • आदर्श पेरेंटिंग को बच्चों के विकास का स्तंभ बताया गया।

  • देशभर के वरिष्ठ डॉक्टरों ने दी नीतिगत बदलाव की सलाह।

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