
Chaitra Navratri: भक्ति की जब अविरल धारा बहती है, तो कण-कण आस्था से सराबोर हो जाता है। कुछ ऐसा ही दिव्य नजारा सोमवार को जाले प्रखंड में देखने को मिला, जहां मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप, मां स्कंदमाता की पूजा के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। पूरे क्षेत्र के मंदिर परिसरों में सुबह से ही ‘जय माता दी’ के जयकारे गूंज रहे थे।
जानकारी के अनुसार, प्रखंड के रतनपुर स्थित प्रसिद्ध रत्नेश्वरी स्थान, दुर्गा बाजार परिसर राढ़ी पश्चिमी तथा जोगियारा पंचायत के कुंज-कुटी समेत विभिन्न पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा और भक्तिभाव से मां के पांचवें स्वरूप की आराधना की। यहां सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मंदिरों को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनियों से सजाया गया था, जिससे माहौल और भी दिव्य हो गया था।
Chaitra Navratri पर विशेष पूजा और उमड़ी भीड़
नवरात्रि को लेकर पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना हुआ है और पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। इस पूरे Chaitra Navratri के दौरान, जाले के इन प्रमुख मंदिरों में विशेष व्यवस्था की गई है। भक्तों ने मां स्कंदमाता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
संतान और मोक्ष की देवी हैं मां स्कंदमाता
कुंज-कुटी के आचार्य पंडित मिथिलेश झा ने मां स्कंदमाता के स्वरूप और उनकी पूजा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मां का यह स्वरूप अत्यंत ममतामयी, शक्ति और मोक्ष प्रदान करने वाला है। उनकी गोद में भगवान स्कंद ‘कुमार कार्तिकेय’ बालरूप में बैठे होते हैं, इसलिए उनकी आराधना से निसंतान दंपतियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके साथ ही, मां अपने भक्तों को ज्ञान भी प्रदान करती हैं, जिससे उपासक का जीवन सफल होता है।


