Child Marriage: कोमल हाथों में किताबों की जगह चूड़ियां, खिलौनों की उम्र में जिम्मेदारियों का बोझ। यह सिर्फ कल्पना नहीं, बल्कि एक कड़वी सच्चाई है जिससे हमारा समाज आज भी जूझ रहा है। इसी सामाजिक बुराई को जड़ से मिटाने के लिए कुशेश्वरस्थान में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
पूर्वी कुशेश्वरस्थान के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गुरुवार को ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ के तहत एक विशेष जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण पहल का निर्देश प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष शिव गोपाल मिश्र ने दिया था। कार्यशाला की अध्यक्षता प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सोहराव ने की, जिसका मुख्य उद्देश्य बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से खत्म करना था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Child Marriage: जागरूकता ही रोकथाम का सबसे बड़ा हथियार
कार्यशाला में पंचायत क्षेत्र से आईं आशा कार्यकर्ताओं और आशा फैसिलिटेटरों को बाल विवाह की रोकथाम के प्रति गहनता से जागरूक किया गया। इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार, दरभंगा द्वारा नामित विधिक स्वयं सेवक (PLV) रामवली राय ने उपस्थित सभी लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि बाल विवाह एक गंभीर कानूनी अपराध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानूनी रूप से विवाह के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष होनी अनिवार्य है। इस नियम का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
कानूनी प्रावधान और दंड का विवरण
रामवली राय ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति निर्धारित आयु से कम उम्र के बच्चों का विवाह कराता है, तो वह भारतीय कानून के तहत सजा का हकदार होगा। इसके लिए दो साल तक की कैद और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस सामाजिक कुप्रथा को समाज से मिटाना हम सभी का सामूहिक कर्तव्य है। उपस्थित सभी आशा कार्यकर्ताओं और फैसिलिटेटरों ने समाज में जागरूकता फैलाने और अपने-अपने क्षेत्रों में बाल विवाह को रोकने की शपथ ली। उन्होंने संकल्प लिया कि वे लोगों को जागरूक करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके अधिकार क्षेत्र में कोई भी बाल विवाह न हो। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
समाज के हर वर्ग की सहभागिता आवश्यक
इस जागरूकता कार्यक्रम में प्रखंड प्रबंधक विनय भूषण, प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक विक्की कुमार, मोहन सिंह, वल्लभ कुमार, हीरा देवी, सुनैना देवी, नीलमणी देवी, रूपम कुमारी, लक्ष्मी कुमारी, बबीता कुमारी, विभा देवी और चित्ररेखा देवी सहित अनेक आशा कार्यकर्ता व फैसिलिटेटर मौजूद रहीं। इस तरह के आयोजनों से समाज में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जगती है। यह अभियान तभी सफल हो सकता है जब हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे और बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह कार्यशाला न केवल जानकारी देने का मंच थी, बल्कि यह सामाजिक बदलाव की एक मजबूत नींव भी थी। हमें उम्मीद है कि यह प्रयास जल्द ही रंग लाएगा और बिहार बाल विवाह मुक्त राज्य बनेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

