
Gorakhpur Road Accident: काल का पहिया जब घूमता है, तो जिंदगी की रफ्तार थम जाती है। गोरखपुर हाईवे पर हुए एक दर्दनाक हादसे ने दरभंगा के एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। दिल्ली-गोरखपुर हाइवे पर यह दुर्घटना तब हुई जब मधुबनी से दिल्ली जा रही एक बस सड़क किनारे खड़े ट्रक से जा भिड़ी, इस घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया है।
Gorakhpur Road Accident ने छीनी परिवार की रोजी-रोटी
जानकारी के अनुसार, दरभंगा के बिरौल थाना क्षेत्र स्थित अकबरपुर बेक गांव के रहने वाले 40 वर्षीय मो. इस्लाम पिछले 15 वर्षों से बस चलाकर अपने परिवार का पेट पाल रहे थे। वे मधुबनी के भेजा से दिल्ली के लिए “आनंद यात्रा” नामक बस के चालक थे। घटना वाली रात भी वे बस लेकर दिल्ली के लिए निकले थे। रात करीब 1 बजे गोरखपुर हाईवे पर उनकी तेज रफ्तार बस एक खड़े ट्रक से टकरा गई। यह बस-ट्रक टक्कर इतनी भीषण थी कि मौके पर ही चीख-पुकार मच गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आसपास के लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचित किया और बचाव कार्य शुरू हुआ। इस हादसे में ड्राइवर मो. इस्लाम गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें फौरन अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बस में सवार कई अन्य यात्री भी घायल हुए हैं, जिनका इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
“10 बजे हुई थी बात, अब कौन बनेगा सहारा?”
इस खबर के मिलते ही अकबरपुर बेक गांव में मातम पसर गया। मो. इस्लाम की शादी चार साल पहले ही शब्बू खातून से हुई थी। उनके परिवार में पत्नी के अलावा एक तीन साल की बेटी आतिफा और डेढ़ साल का बेटा मो. अहान है। परिजनों ने बताया कि इस्लाम 12 दिन पहले ही घर से ड्यूटी पर लौटे थे। दुर्घटना से कुछ घंटे पहले, रात करीब 10 बजे उन्होंने अपनी पत्नी से फोन पर बात की और कहा था कि कहीं रुकने पर दोबारा फोन करेंगे। लेकिन अगला फोन उनकी मौत की खबर लेकर आया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मृतक की पत्नी शब्बू खातून का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने बिलखते हुए कहा, “रात में बात हुई थी, बोले थे कि बस रोकेंगे तो फोन करेंगे… अब मेरा सहारा कौन बनेगा? मेरे छोटे-छोटे बच्चों का क्या होगा?” परिवार और गांव के लोग सरकार से मुआवजे की मांग कर रहे हैं ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके। मृतक के चाचा मो. अनीश ने बताया कि इस्लाम बहुत नेक दिल इंसान थे और अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद गरीबों की मदद करते थे।







