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फ़रवरी, 14, 2026
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Darbhanga Law College News: मिथिला के ऐतिहासिक सीएम लॉ कॉलेज पर संकट के बादल, अधिवक्ता बनेंगे अब प्रहरी, उठाई अस्मिता बचाने की आवाज

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Darbhanga Law College News: शिक्षा के मंदिर में जब ज्ञान की किरणें मंद पड़ने लगें, और छात्र अपने भविष्य के लिए संघर्ष करें, तब समाज के प्रहरी आवाज़ उठाते हैं।

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Darbhanga Law College News: मिथिला के ऐतिहासिक सी.एम. लॉ कॉलेज पर संकट के बादल, अधिवक्ताओं ने उठाई अस्मिता बचाने की मांग

Darbhanga Law College News: मिथिला में विधि शिक्षा की दशकों पुरानी विरासत को बचाने की पुकार

मिथिला की पावन भूमि पर वर्ष 1944 से विधि स्नातक की पढ़ाई एक गौरवशाली परंपरा रही है। लेकिन, अब इस परंपरा पर मंडराते संकट को दूर करने के लिए दरभंगा के अधिवक्ताओं ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष से गुहार लगाई है। जिला बार एसोसिएशन, दरभंगा के सदस्यों ने एक महत्वपूर्ण स्मार पत्र भेजकर मिथिला के ऐतिहासिक सी. एम. लॉ. कॉलेज की अस्मिता को बचाने की मांग की है।

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अधिवक्ताओं ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया से यह भी आग्रह किया है कि ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, कामेश्वर नगर, दरभंगा के कुलाधिपति और कुलपति को सूचित कर गैर-विधि डिग्रीधारी प्रभारी प्राचार्य की जगह एक योग्य विधि डिग्रीधारी प्राचार्य या प्रभारी प्राचार्य की तत्काल नियुक्ति की जाए। स्मार पत्र में बताया गया है कि आजादी से पहले, वर्ष 1944-45 में, इस प्रतिष्ठित संस्थान में बैचलर ऑफ लॉ की पढ़ाई शुरू हुई थी। वर्ष 1971 से लेकर सत्र 2010-11 तक, एल. एल. बी. कोर्स में लगातार 320 छात्रों का नामांकन और पठन-पाठन सफलतापूर्वक चलता रहा है। इस ऐतिहासिक संस्थान की वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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हालांकि, बी.सी.आई. के मानकों के अनुरूप इस विधि महाविद्यालय में पूर्णकालिक प्राचार्य, 11 पूर्णकालिक शिक्षकों की पदस्थापना नहीं होने और वर्ग संचालन के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना के अभाव के कारण ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के इस अंगीभूत इकाई, सी.एम. लॉ. कॉलेज में वर्ष 2021 से 2024-25 तक छात्रों के नामांकन पर रोक लगा दी गई थी।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के निरीक्षण के बाद, सत्र 2025-26 में पूर्व में स्वीकृत 320 छात्रों के नामांकन की जगह मात्र 60 छात्रों के नामांकन की सशर्त अनुमति दी गई है, और वर्तमान में उन्हीं छात्रों की पढ़ाई जारी है। यह स्थिति न केवल कॉलेज के भविष्य के लिए बल्कि मिथिला क्षेत्र में विधि शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक छात्रों के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। गुणवत्तापूर्ण विधि शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए, महाविद्यालय में पर्याप्त संसाधनों का होना अत्यंत आवश्यक है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

विश्वविद्यालय प्रशासन की ज़िम्मेदारी और छात्रों का भविष्य

स्मार पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कॉलेज में पूर्णकालिक प्राचार्य, पूर्णकालिक शिक्षकों की पदस्थापना और आधारभूत संरचना के साथ-साथ आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था करना विश्वविद्यालय प्रशासन का कर्तव्य और नैतिक दायित्व है। अधिवक्ताओं का मानना है कि इस प्रतिष्ठित संस्थान की गरिमा को बहाल करना और छात्रों को विधि की पढ़ाई से वंचित न करना अत्यंत महत्वपूर्ण है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

मिथिला के अधिवक्ताओं ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया से आग्रह किया है कि वे अपने स्तर से बिहार के कुलाधिपति को सूचित कर इस प्रतिष्ठित सी.एम. लॉ. कॉलेज, दरभंगा में बी.सी.आई. के मानकों के अनुरूप पूर्णकालिक प्राचार्य, शिक्षकों की पदस्थापना और शिक्षण कार्य के लिए आधारभूत भवन संरचना का निर्माण कराएँ। उनकी मांग है कि कॉलेज में पहले से स्वीकृत 320 छात्रों के नामांकन का मार्ग पुनः प्रशस्त किया जाए, ताकि मिथिला के छात्र बेहतर कानूनी शिक्षा प्राप्त कर सकें। इस मुद्दे पर त्वरित कार्रवाई की उम्मीद है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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स्मार पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में अधिवक्ता सुधीर कुमार चौधरी, विजय नारायण चौधरी, अनिल कुमार मिश्रा, बुलन कुमार झा, कुमार उत्तम, मुरारी लाल केवट, सनोज कुमार, मनोज कुमार, हीरानंद मिश्रा, संपूर्णानंद झा सहित दर्जनों से अधिक अधिवक्ताओं के नाम शामिल हैं, जो इस लड़ाई में एकजुटता दिखा रहे हैं।

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