



Darbhanga News: कानून के हाथ भले ही लंबे होते हैं, लेकिन जब इंसाफ का हथौड़ा चलता है तो बड़े-बड़े अपराधियों के पसीने छूट जाते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ दरभंगा में, जहां एक साल से अधिक पुराने हत्याकांड में अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है।
दरभंगा के अपर सत्र न्यायाधीश नागेश प्रताप सिंह की अदालत ने सोमवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए एपीएम थाना क्षेत्र के परमार निवासी रवींद्र मांझी को गैर-इरादतन हत्या और साक्ष्य छिपाने के आरोप में दोषी करार दिया है। अभियुक्त को भारतीय दंड विधान की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) और 201 (सबूत मिटाना) के तहत दोषी पाया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अदालत अब 2 मार्च को सजा के बिंदुओं पर सुनवाई के बाद अपना अंतिम फैसला सुनाएगी।
Darbhanga News: जानिए क्या था पूरा मामला
अभियोजन पक्ष की ओर से मामले का संचालन कर रहे एपीपी अरुण कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि यह मामला साल 2022 का है। एपीएम थाना कांड संख्या 239/22 के अनुसार, परमार गांव के रहने वाले नागे सदा 23 दिसंबर 2022 को अपने खेत में पटवन करने के लिए घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। काफी खोजबीन के बाद भी जब उनका कुछ पता नहीं चला, तो उनके बेटे राम भरोस सदा ने थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
पुलिस ने जब जांच शुरू की और अभियुक्त रवींद्र मांझी को गिरफ्तार कर पूछताछ की, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसी की निशानदेही पर पुलिस ने लक्ष्मीनिया पोखर से मृतक नागे सदा का शव बरामद किया था। इस मामले में दरभंगा सिविल कोर्ट में सत्रवाद संख्या 289/23 के तहत सुनवाई प्रारंभ हुई और अदालत में 10 अप्रैल 2023 को अभियुक्त के विरुद्ध आरोप तय किए गए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
2 मार्च को होगा सजा का ऐलान
अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपनी दलीलों को मजबूती से रखा और कुल 7 गवाहों की गवाही करवाई, जिसके आधार पर कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। गौरतलब है कि दोषसिद्ध करार दिया गया अभियुक्त रवींद्र मांझी 28 दिसंबर 2022 से ही न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है।
अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद अब सभी की निगाहें 2 मार्च की तारीख पर टिकी हैं, जब न्यायाधीश नागेश प्रताप सिंह सजा की अवधि का निर्धारण करेंगे। इस फैसले से मृतक के परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है।


