



Darbhanga News: न्याय के मंदिर में जब बेंच और बार एक दूसरे का हाथ थाम लें, तो न्याय की धारा और भी वेग से बह निकलती है। दरभंगा व्यवहार न्यायालय में कुछ ऐसा ही देखने को मिला है, जहां न्यायाधीशों के एक अभूतपूर्व कदम ने वकीलों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है।
Darbhanga News: न्यायाधीशों की इस पहल से वकीलों में खुशी की लहर
दरभंगा व्यवहार न्यायालय में न्यायिक व्यवस्था के एक महत्वपूर्ण अंग, बार एसोसिएशन के कल्याण के लिए एक अनूठी पहल की गई है। यहां की अदालतों ने विभिन्न मामलों में अभियुक्तों पर लगाए गए जुर्माने की राशि को सीधे बार एसोसिएशन के खाते में जमा करने का आदेश पारित किया है, जिसकी सर्वत्र सराहना हो रही है। उत्पाद अधिनियम के विशेष न्यायाधीश रविशंकर कुमार की अदालत ने दो अलग-अलग मामलों में क्रमशः दस हजार और तीन हजार रुपये का जुर्माना बार एसोसिएशन के खाते में जमा करने का आदेश दिया। इसके बाद बुधवार को भी दो अन्य मामलों में पांच हजार और तीन हजार रुपये जमा करने का आदेश पारित किया गया, जिसे अभियुक्तों द्वारा जमा करा दिया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इसी कड़ी में, उत्पाद विभाग के विशेष न्यायाधीश श्रीराम झा की अदालत ने भी एक सराहनीय कदम उठाया। स्पेशल पीपी हरेराम साहू ने जानकारी देते हुए बताया कि न्यायाधीश श्रीराम झा ने दो मामलों में क्रमशः पांच हजार और दस हजार रुपये की राशि जिला बार एसोसिएशन के कल्याण कोष में जमा करने का आदेश पारित किया। इन दोनों मामलों के अभियुक्तों ने अपने अधिवक्ताओं, रघुवर झा और सुधीर कुमार चौधरी के माध्यम से यह राशि एसोसिएशन के खाते में जमा भी करा दी है। न्यायालय के इस कदम से बार और बेंच के बीच समन्वय का एक बेहतरीन उदाहरण पेश हुआ है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
बार और बेंच के समन्वय की अनूठी मिसाल
न्यायालय के इस अभूतपूर्व फैसले से दरभंगा बार एसोसिएशन के लगभग दो हजार दो सौ वकीलों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई है। लंबे समय से वकीलों के कल्याण के लिए इस तरह की पहल की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। वकीलों का मानना है कि यह कदम न केवल उनकी आर्थिक मदद करेगा, बल्कि न्यायपालिका में उनके महत्व को भी रेखांकित करेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। बार एसोसिएशन के महासचिव कृष्ण कुमार मिश्रा ने इस पहल के लिए दोनों न्यायाधीशों का हृदय से आभार व्यक्त किया है।
उन्होंने कहा कि यह फैसला बार और बेंच के मजबूत रिश्ते को दर्शाता है। यह सर्वविदित है कि बार को न्यायाधीशों की जननी कहा जाता है, क्योंकि अधिवक्ता ही न्यायिक सेवा की परीक्षा पास कर न्यायाधीश बनते हैं। ऐसे में बेंच द्वारा बार के कल्याण के बारे में सोचना एक अत्यंत सकारात्मक संदेश देता है। इस खबर के बाद से हर एक अधिवक्ता के बीच हर्ष का माहौल व्याप्त है।


