दरभंगा में इन दिनों न्यायपालिका की सक्रियता चर्चा में है। एक तरफ जहां महिला पुलिसकर्मियों से मारपीट के आरोपी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी गई, वहीं चार अन्य आरोपियों को भी कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। इन फैसलों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
दरभंगा में महिला पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट के गंभीर मामले में नामजद आरोपी राजू कुमार को न्यायिक राहत नहीं मिली है। जिला न्यायमंडल दरभंगा के सत्र न्यायाधीश शिव गोपाल मिश्रा की अदालत ने पैगंबरपुर गांव निवासी विनोद कुमार साह के पुत्र राजू कुमार की नियमित जमानत याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। आरोपी पर सिंहवाड़ा थाना परिसर में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों से बदसलूकी और मारपीट का आरोप है।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि आरोपी राजू कुमार अब नौ महीने बाद ही अपनी जमानत के लिए फिर से आवेदन कर सकेगा। यह फैसला मामले की गंभीरता और न्याय प्रक्रिया की दृढ़ता को दर्शाता है, खासकर जब मामला सरकारी कार्य में बाधा और पुलिसकर्मियों पर हमले से जुड़ा हो।
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अन्य चार आरोपियों को भी अग्रिम जमानत से इनकार
सत्र न्यायाधीश शिव गोपाल मिश्रा की अदालत ने केवल राजू कुमार के मामले में ही नहीं, बल्कि चार अन्य गंभीर मामलों में भी सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने आर्म्स एक्ट, जानलेवा हमला और दहेज उत्पीड़न जैसे अपराधों से जुड़े चार आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाओं को भी खारिज कर दिया।
इन सभी चारों आरोपियों को न्यायालय ने तत्काल आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद अब इन आरोपियों को संबंधित अदालत में पेश होकर ही कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा।
पटना हाईकोर्ट या समर्पण ही एकमात्र विकल्प
लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने कोर्ट के इन फैसलों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि अब इन सभी पांचों आरोपियों के पास जमानत प्राप्त करने के लिए केवल दो मुख्य विकल्प शेष हैं। या तो उन्हें पटना उच्च न्यायालय में अपनी जमानत अर्जी दाखिल करनी होगी, या फिर संबंधित निचली अदालत में आत्मसमर्पण कर नियमित जमानत के लिए आवेदन करना होगा। इन फैसलों से यह स्पष्ट हो गया है कि न्यायपालिका गंभीर अपराधों में कोई ढिलाई बरतने को तैयार नहीं है।



