



Darbhanga News: कानून के लंबे हाथ जब किसी की गिरेबान तक पहुँचते हैं, तो फिर अदालत की चौखट से राहत की उम्मीद करना आसान नहीं होता। दरभंगा की अदालतों ने कुछ ऐसा ही संदेश दिया है, जहां तीन जघन्य अपराधों के आरोपियों को फिलहाल सलाखों के पीछे ही रहना होगा।
जिले के विभिन्न सत्र न्यायालयों ने हत्या, लूट और धोखाधड़ी जैसे संगीन मामलों में दायर जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कड़ा रुख अपनाया है। लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि अदालत के इस फैसले से न्याय व्यवस्था में लोगों का विश्वास और भी मजबूत होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि गंभीर प्रकृति के अपराधों में नरमी की कोई गुंजाइश नहीं है।
Darbhanga News: इन तीन बड़े मामलों में नहीं मिली राहत
न्यायालय ने जिन मामलों में आरोपियों को किसी भी तरह की राहत देने से इंकार कर दिया, वे सभी समाज को दहलाने वाले अपराधों से जुड़े हैं। लोक अभियोजक के अनुसार, इन फैसलों का विवरण इस प्रकार है:
- साले की निर्मम हत्या का मामला: प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार पाण्डेय की अदालत ने जाले थानाकांड संख्या 87/25 में यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। इस मामले में योगियारा निवासी बहनोई हरिचन्दर राम पर अपने ही साले की बेरहमी से हत्या करने का आरोप है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने उसकी नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
- धोखाधड़ी और गबन का केस: इसी अदालत ने सदर थानाकांड संख्या 607/23 में भी एक कड़ा निर्णय दिया। यहाँ सिक्योरिटी एजेंसी के नाम पर फर्जी खाता खोलकर रुपये गबन करने के आरोपी किरण कुमार आचार्य की अग्रिम जमानत अर्जी को भी नामंजूर कर दिया गया।
- पिस्तौल की नोंक पर लूट: वहीं, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश उपेंद्र कुमार की अदालत ने बहेड़ी थानाकांड संख्या 345/25 के आरोपी को कोई राहत नहीं दी। उजैना गांव के रहने वाले संजीत लालदेव पर पिस्तौल सटाकर लूटपाट करने और जानलेवा हमला करने का गंभीर आरोप है, जिसके चलते उसकी अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज कर दी गई। इस तरह के आपराधिक मामले समाज में असुरक्षा का भाव पैदा करते हैं।
समाज में अपराध पर लगेगी लगाम
इन फैसलों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने कहा कि जब जघन्य अपराधों से जुड़े मामलों में आरोपियों को आसानी से जमानत नहीं मिलती है, तो इसका समाज पर एक बहुत ही सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा, “इस तरह के कड़े न्यायिक फैसलों से अपराधियों के हौसले पस्त होते हैं और आपराधिक घटनाओं में निश्चित रूप से कमी आती है।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह न्यायपालिका द्वारा उठाया गया एक सराहनीय कदम है जो कानून के राज को और मजबूत करेगा।
दरभंगा न्यायालय के इन फैसलों ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि गंभीर अपराधों के प्रति न्याय व्यवस्था कोई नरमी बरतने के मूड में नहीं है। इससे न केवल पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने की उम्मीद बंधी है, बल्कि आम नागरिकों में भी सुरक्षा की भावना बढ़ी है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।


