

Darbhanga News: न्याय के मंदिर में अपराधियों के मंसूबों पर एक बार फिर पानी फिर गया है, जहां दो अलग-अलग संगीन मामलों में अदालत ने अपना सख्त रुख अपनाते हुए आरोपियों को किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया है। दरभंगा सिविल कोर्ट ने हत्या और हत्या के प्रयास जैसे जघन्य अपराधों में शामिल दो आरोपियों की जमानत याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है।
Darbhanga News: जानें किन दो मामलों में अदालत ने सुनाया फैसला
मामले की जानकारी देते हुए लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने बताया कि पहला मामला गोली मारकर हत्या करने के एक गंभीर आरोप से जुड़ा है। यह मामला बहादुरपुर थाना कांड संख्या 509/24 के तहत दर्ज है। इस केस में जेल में बंद अभियुक्त जीतू यादव उर्फ जितेंद्र कुमार यादव ने नियमित जमानत के लिए अर्जी दी थी। अपर सत्र न्यायाधीश उपेंद्र कुमार की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए और अभियोजन पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद अभियुक्त की जमानत याचिका को अस्वीकार कर दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
वहीं, दूसरा मामला भी कुछ कम संगीन नहीं है। इसमें पिस्तौल से फायर कर हत्या का प्रयास करने का आरोप है, जो कमतौल थाना कांड संख्या 208/25 के रूप में दर्ज है। इस मामले में काराधीन अभियुक्त अरविंद यादव उर्फ अरविंद कुमार यादव ने नियमित जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अपर सत्र न्यायाधीश नागेश प्रताप सिंह की अदालत ने इस मामले में भी कड़ा रुख दिखाते हुए अभियुक्त की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया।
लोक अभियोजक श्री झा ने दोनों मामलों में अभियोजन पक्ष की तरफ से जोरदार बहस की और अदालत को यह बताने में सफल रहे कि आरोपियों को जमानत देना न्याय के हित में नहीं होगा। दोनों ही मामलों में अदालत का यह फैसला क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
अब उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे आरोपी
जिला अदालत से राहत न मिलने के बाद अब दोनों आरोपियों के पास कानूनी प्रक्रिया के तहत ऊपरी अदालत में जाने का विकल्प बचा है। लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने इस पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भले ही यहां उनकी जमानत याचिका खारिज हो गई हो, लेकिन दोनों जघन्य मामलों के आरोपियों को नियमित जमानत के लिए पटना उच्च न्यायालय जाने का अवसर है। अब यह देखना होगा कि उच्च न्यायालय इस मामले में क्या रुख अपनाता है। फिलहाल, दरभंगा कोर्ट के इस फैसले से पीड़ित पक्षों को न्याय की उम्मीद बंधी है।




