
UPSC Topper: खेत में पसीना बहाते मजदूर माँ-बाप की बेटी ने आसमान में सुराख कर दिया है। दरभंगा की नरगिस परवीन ने UPSC में 51वीं रैंक लाकर साबित कर दिया कि मेहनत और लगन के आगे हर मुश्किल छोटी पड़ जाती है। दरभंगा के सिंहवाड़ा प्रखंड स्थित बहुआरा बुजुर्ग गांव की रहने वाली डॉ. नरगिस परवीन वर्तमान में दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में जूनियर रेजिडेंट के पद पर कार्यरत हैं। उनकी यह सफलता उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखते हैं।
डॉ. नरगिस के पिता मोहम्मद साजिद और माता समीदा खातून ने मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण किया। नरगिस अपने चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं। उनके तीन भाई हैं और वह इकलौती बेटी हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद, उनके माता-पिता ने यह सुनिश्चित किया कि बच्चों की शिक्षा में कोई बाधा न आए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
UPSC Topper नरगिस परवीन का संघर्ष भरा सफर
डॉ. नरगिस परवीन ने अपनी शुरुआती शिक्षा गांव के ही एक मध्य विद्यालय से प्राप्त की। इसके बाद, उन्होंने पिण्डारुच हाई स्कूल से नौवीं और दसवीं कक्षा पास की। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के लिए उन्होंने दरभंगा के प्रतिष्ठित सीएम साइंस कॉलेज में दाखिला लिया। उनकी मेहनत यहीं नहीं रुकी, उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में नीट (NEET) की परीक्षा उत्तीर्ण कर डीएमसीएच में अपनी जगह पक्की कर ली। यहाँ से एमबीबीएस की डिग्री पूरी करने के बाद वह वर्तमान में गायनिक विभाग में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
नरगिस ने बताया कि अस्पताल में मरीजों की सेवा के साथ-साथ वह सिविल सेवा परीक्षा (Civil Services Exam) की तैयारी भी करती थीं। सबसे खास बात यह है कि इस कठिन परीक्षा के लिए उन्होंने किसी कोचिंग संस्थान की मदद नहीं ली। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने अपनी तैयारी के लिए यूट्यूब और अन्य ऑनलाइन संसाधनों पर भरोसा किया। उनके दो भाई बेंगलुरु में काम करते हैं, जबकि सबसे छोटा भाई उन्हीं के साथ रहकर ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
आईएएस और आईपीएस को देखकर लिया था संकल्प
नरगिस बताती हैं कि जब भी वह किसी आईएएस या आईपीएस अधिकारी को देखती थीं, तो उनके मन में भी देश सेवा का जज्बा पैदा होता था। उन्होंने तभी ठान लिया था कि वह एक दिन आईएएस अधिकारी बनकर समाज की सेवा करेंगी। आज अपनी इस शानदार सफलता से वह बेहद खुश हैं।
वहीं, बेटी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर पिता मोहम्मद साजिद भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि पत्नी के साथ खेतों में मजदूरी करके बच्चों को पढ़ाया और आज बेटी ने उनकी सारी मेहनत सफल कर दी। नरगिस की इस कामयाबी से पूरे गांव में जश्न का माहौल है और हर कोई उन पर गर्व कर रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





