Darbhanga News: दरभंगा में एक बड़ी लापरवाही सामने आई है, जिसका सीधा असर हजारों बच्चों के भविष्य पर पड़ सकता है। सरकारी स्कूलों की अनदेखी ने 43,660 छात्र-छात्राओं के लिए लाभुक योजनाओं का दरवाजा बंद करने का खतरा पैदा कर दिया है। आखिर क्यों खतरे में है इन मासूमों का भविष्य और इसके पीछे कौन जिम्मेदार है?
जिले के सभी कोटि के सरकारी विद्यालयों के स्कूल प्रधानों की लापरवाही के कारण शैक्षणिक सत्र 2025-26 में 43,660 नामांकित विद्यार्थी विभिन्न सरकारी लाभुक योजनाओं से वंचित हो सकते हैं। यह स्थिति तब बनी है जब 35 सरकारी विद्यालयों ने अब तक यू-डायस पोर्टल पर छात्रों से संबंधित डेटा अपलोड करने का कार्य शुरू ही नहीं किया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के लिए यह एक चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि इसका सीधा खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ेगा।
यू-डायस पोर्टल पर डेटा अपलोड न होने का कारण
जानकारी के अनुसार, संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों द्वारा डेटा अपलोडिंग को लेकर बरती गई उदासीनता इस बड़ी समस्या का मूल कारण है। यू-डायस पोर्टल पर छात्रों की जानकारी जैसे नाम, कक्षा, जन्मतिथि, आधार नंबर और अन्य महत्वपूर्ण विवरण अपलोड किए जाने होते हैं। यह डेटा ही सरकारी योजनाओं, जैसे छात्रवृत्ति, पोशाक योजना, साइकिल योजना और अन्य लाभों के लिए पात्रता का आधार बनता है। डेटा अपलोड न होने की स्थिति में, इन हजारों बच्चों की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध नहीं होगी, जिससे वे स्वचालित रूप से इन योजनाओं के दायरे से बाहर हो जाएंगे।
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इस चूक के कारण न केवल छात्रों को वित्तीय सहायता से वंचित होना पड़ेगा, बल्कि शिक्षा विभाग के लिए भी पूरे जिले के शैक्षणिक आँकड़ों को अद्यतन रखने में कठिनाई होगी। सूत्रों के मुताबिक, शिक्षा विभाग ने सभी स्कूल प्रधानों को इस संबंध में कई बार निर्देश जारी किए हैं, लेकिन इसके बावजूद 35 स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने इन निर्देशों की अनदेखी की है। अब विभाग इस मामले में सख्त कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही को रोका जा सके।
क्या हैं संभावित परिणाम?
यदि यह डेटा जल्द से जल्द अपलोड नहीं किया जाता है, तो वित्तीय वर्ष 2025-26 में 43,660 छात्रों को मिलने वाले लाभों पर सीधा असर पड़ेगा। यह न सिर्फ छात्रों और उनके परिवारों के लिए निराशाजनक होगा, बल्कि शिक्षा के अधिकार के तहत मिलने वाले लाभों से वंचित होने जैसा भी होगा। शिक्षा विभाग के अधिकारियों से उम्मीद की जा रही है कि वे जल्द से जल्द शेष स्कूलों से संपर्क कर डेटा अपलोड सुनिश्चित करवाएंगे, ताकि किसी भी छात्र का भविष्य इस प्रशासनिक चूक का शिकार न हो।



