
दरभंगा न्यूज़: बिहार के दरभंगा में एक गांव ऐसा है, जहां शनिवार का दिन कई परिवारों के लिए किसी सदमे से कम नहीं रहा। अचानक चले बुलडोजर ने दशकों से बसे आशियानों को पल भर में मलबे में तब्दील कर दिया। आखिर क्यों प्रशासन को इतनी बड़ी कार्रवाई करनी पड़ी और क्या है इस पूरे मामले का सच, जिसने गांव में तनाव पैदा कर दिया?
अतिक्रमण पर चला बुलडोजर
दरभंगा के बहादुरपुर प्रखंड स्थित सिमरा निहालपुर पंचायत के लाल शाहपुर गांव में शनिवार को एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिली। पटना हाई कोर्ट के निर्देश पर सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत करीब 40 से 45 घरों को बुलडोजर की मदद से ध्वस्त कर दिया गया। प्रशासन ने पहले ही 125 घरों को अतिक्रमण खाली करने के लिए नोटिस जारी किया था। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था, साथ ही डीसीएलआर सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। इस अचानक हुई कार्रवाई से पूरे गांव में गहरा तनाव फैल गया, और कई लोग अपने घरों को टूटता देख भावुक हो उठे।
ग्रामीणी आरोप: भू-माफियाओं की साजिश?
गांव वालों ने इस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह कार्रवाई किसी सोची-समझी साजिश का नतीजा है। ग्रामीणों के मुताबिक, पास की एक विवादित जमीन पर बाउंड्री निर्माण के बाद कुछ ‘प्रभावशाली’ लोगों ने इस मामले को हाई कोर्ट तक पहुंचाया। अधिकांश ग्रामीणों को इस न्यायिक प्रक्रिया की कोई जानकारी नहीं थी। उनका आरोप है कि जिस जमीन को ‘सड़क’ बताकर खाली कराया जा रहा है, वहां लोग दशकों से शांतिपूर्ण तरीके से रह रहे थे और इसी रास्ते का उपयोग गांव वाले करते आ रहे थे। कई लोगों ने सीधे तौर पर ‘भू-माफियाओं’ पर आरोप लगाया है कि उनकी मिलीभगत से वर्षों से बसे परिवारों को बेघर कर दिया गया है।
प्रशासन का रुख: हाई कोर्ट के आदेश का पालन
प्रशासन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से हाई कोर्ट के आदेशों के अनुरूप की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान किसी व्यक्तिगत हित या साजिश का हिस्सा नहीं, बल्कि न्यायिक निर्देशों का पालन है। प्रशासन ने यह भी दोहराया कि सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया भविष्य में भी जारी रहेगी। यह कार्रवाई उन सभी लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जिन्होंने सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जा जमा रखा है।




