Darbhanga Hospital News: दरभंगा में स्वास्थ्य विभाग की एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। शहर के एक निजी अस्पताल और दो डायग्नोस्टिक सेंटरों को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है। एक मरीज की दुखद मौत के बाद मिली शिकायत पर यह सख्त कदम उठाया गया है, जिसने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह कार्रवाई सिविल सर्जन डॉ. अरुण कुमार के निर्देश पर गठित एक तीन सदस्यीय जांच टीम ने की है। टीम ने अललपट्टी स्थित आद्या डायग्नोस्टिक सेंटर और नीलकंठ हॉस्पिटल का गहन निरीक्षण किया। इसके साथ ही, बेंता चौक स्थित पूनम डायग्नोस्टिक सेंटर पर भी टीम ने अपनी जांच पड़ताल की और कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
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कैसे हुई मरीज की मौत? चौंकाने वाला खुलासा
जांच टीम के सदस्य डॉ. प्रेमचंद प्रसाद ने इस पूरे प्रकरण पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्हें एक गंभीर शिकायत मिली थी। शिकायत के अनुसार, आद्या डायग्नोस्टिक सेंटर में एक मरीज के रक्त समूह का परीक्षण किया गया था। इस रिपोर्ट में गंभीर त्रुटियां पाई गईं, जिसका खामियाजा मरीज को भुगतना पड़ा।
उन्होंने आगे बताया कि इस गलत परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर नीलकंठ हॉस्पिटल में मरीज को रक्त चढ़ाया गया। दुर्भाग्यवश, रक्त चढ़ाने के कुछ ही समय बाद मरीज की तबीयत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया और तत्काल कार्रवाई की मांग की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कार्रवाई का फैसला लिया। आद्या डायग्नोस्टिक सेंटर और नीलकंठ हॉस्पिटल दोनों को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है। विभाग का कहना है कि प्रारंभिक जांच में ही इन केंद्रों पर कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, जिनकी विस्तृत जांच की जाएगी।
पूनम डायग्नोस्टिक सेंटर पर भी लटकी तलवार, क्यों हुई कार्रवाई?
केवल आद्या डायग्नोस्टिक सेंटर ही नहीं, बेंता चौक पर स्थित पूनम डायग्नोस्टिक सेंटर के खिलाफ भी शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इस सेंटर पर भी रक्त जांच में गड़बड़ी और अन्य अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। मरीजों की सुरक्षा के मद्देनजर इन शिकायतों को गंभीरता से लिया गया।
जांच टीम ने जब पूनम डायग्नोस्टिक सेंटर का निरीक्षण किया, तो उन्हें प्रारंभिक स्तर पर ही कई अनियमितताएं मिलीं। इन अनियमितताओं के चलते इस केंद्र को भी सील करने का फैसला लिया गया। यह दर्शाता है कि यह समस्या केवल एक केंद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक स्तर पर सुधार की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम में कौन-कौन शामिल थे? आगे की कार्रवाई
सिविल सर्जन डॉ. अरुण कुमार द्वारा गठित इस तीन सदस्यीय जांच टीम में बहादुरपुर सीएचसी के प्रभारी डॉ. तारिक मंजर शामिल थे। उनके साथ सिंहवाड़ा पीएचसी के प्रभारी डॉ. प्रेमचंद प्रसाद और एक दंडाधिकारी भी इस टीम का हिस्सा थे। इस टीम ने पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ अपनी जांच प्रक्रिया को अंजाम दिया।
Bihar Health Department ने इस पूरे प्रकरण को अत्यंत गंभीरता से लिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने वाली किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब सील किए गए सभी केंद्रों के खिलाफ विस्तृत जांच प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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स्वास्थ्य विभाग ने जनता से अपील की है कि वे ऐसे स्वास्थ्य केंद्रों या लैब के खिलाफ बेझिझक शिकायत दर्ज कराएं जहां उन्हें अनियमितता या लापरवाही दिखे। विभाग का लक्ष्य है कि मरीजों को सुरक्षित, विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलें। इस मामले में दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति को रोका जा सके और स्वास्थ्य प्रणाली पर जनता का विश्वास बना रहे।







