



Jeevika Loan Scheme: जैसे बंजर जमीन पर पानी की पहली बूंद उम्मीद की फसल उगा देती है, वैसे ही दरभंगा में जीविका निधि की ऋण नीति महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का नया सवेरा लेकर आई है। जिले में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें साहूकारों के कर्ज के जाल से मुक्त कराने के लिए एक बड़ी पहल की गई है।
गुरुवार, 12 फरवरी 2026 को दरभंगा के डीएमसीएच परिसर में स्थित जीविका दीदी की रसोई में बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संघ लिमिटेड की ऋण नीति पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में जिले के सभी 18 प्रखंडों से आए कुल 207 जीविका परियोजना कर्मियों ने हिस्सा लिया और प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यक्रम की शुरुआत जिला परियोजना प्रबंधक डॉ. ऋचा गार्गी, शांतनु ठाकुर, ब्रजकिशोर गुप्ता, राजा सागर, रिसोर्स पर्सन पन्नालाल एवं राजेश जी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर की।
उद्घाटन सत्र के दौरान जिला परियोजना प्रबंधक डॉ. ऋचा गार्गी ने कहा कि जीविका निधि के माध्यम से समूह की महिलाओं को सही समय पर ऋण मिलेगा, जिससे वे छोटे व्यवसाय, कृषि, पशुपालन, सिलाई-कढ़ाई, दुकान और उत्पादन इकाइयों जैसे क्षेत्रों में अपनी भागीदारी बढ़ा सकेंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे न केवल उनकी मासिक आय में वृद्धि होगी, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।
Jeevika Loan Scheme की ऋण नीति पर कार्यशाला का आयोजन
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जीविका से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए एक सरल, पारदर्शी और कम ब्याज दर वाली ऋण सुविधा की जानकारी देना था। इस दौरान ऋण नीति की विस्तृत जानकारी देते हुए ब्रजकिशोर गुप्ता ने बताया कि पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है। प्रतिभागियों को ‘जीविका निधि मोबाइल एप’ के माध्यम से ऋण के लिए आवेदन करने, उसकी स्वीकृति, वितरण और वसूली की प्रक्रिया को समझाया गया। प्रशिक्षकों ने लाइव डेमो के माध्यम से एप के उपयोग की पूरी प्रक्रिया भी बताई, ताकि जमीनी स्तर पर कोई भ्रम न रहे। यह कदम महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी छलांग है।
संचार प्रबंधक राजा सागर ने इस पहल को माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं (एमएफआई) से मुक्ति की दिशा में एक सशक्त कदम बताया। उन्होंने कहा कि अक्सर महिलाएं ऊंची ब्याज दरों पर ऋण लेने को मजबूर होती हैं, जिससे वे कर्ज के दुष्चक्र में फंस जाती हैं। जीविका निधि उन्हें इस समस्या से निजात दिलाएगी और सुरक्षित, पारदर्शी और सस्ती ऋण सुविधा प्रदान करेगी। इससे दीदियों की आय बढ़ाने पर जोर दिया जा सकेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
ऋण की श्रेणियां और ब्याज दर की पूरी जानकारी
सूक्ष्म वित्त प्रबंधक सुबीर झा ने प्रशिक्षण के दौरान ऋण की विभिन्न श्रेणियों और उनकी शर्तों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी प्रकार के ऋणों पर केवल 12 प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर लागू होगी, जो बाजार में उपलब्ध अन्य विकल्पों की तुलना में काफी कम है।
ऋणों का वर्गीकरण इस प्रकार है:
- अल्पकालिक ऋण: ₹15,000 तक (12 महीने की अवधि के लिए)
- सूक्ष्म ऋण: ₹15,000 से ₹75,000 तक (24 महीने की अवधि के लिए)
- लघु ऋण: ₹75,000 से ₹2,00,000 तक (36 महीने की अवधि के लिए)
पात्रता के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि 18 से 65 वर्ष आयु वर्ग की सक्रिय समूह सदस्यों को लोकओएस (LokOS) के माध्यम से सत्यापन के बाद यह ऋण दिया जाएगा। हालांकि, जिन सदस्यों के खाते एनपीए (NPA) हैं या जो सरकारी कर्मचारी हैं, वे इस योजना के पात्र नहीं होंगे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। उन्होंने यह भी बताया कि प्राकृतिक आपदा या किसी विशेष परिस्थिति में ऋण के पुनर्गठन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
विशेषज्ञों ने दिया मार्गदर्शन, महिलाओं को मिलेगा सही रास्ता
कार्यशाला में मौजूद रिसोर्स पर्सन पन्नालाल एवं राजेश जी ने जीविका निधि के संचालन, नियमों, जोखिम प्रबंधन और पारदर्शिता प्रणाली पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने सभी कर्मियों से आह्वान किया कि वे क्षेत्र स्तर पर महिलाओं को सही मार्गदर्शन दें ताकि योजना का लाभ हर जरूरतमंद तक पहुंच सके। इस कार्यशाला में जिला स्तर के सभी प्रबंधक, सभी प्रखंडों के बीपीएम, क्षेत्रीय समन्वयक, सामुदायिक समन्वयक और अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण को बेहद उपयोगी बताया और कहा कि इससे उन्हें क्षेत्र में योजना को बेहतर ढंग से लागू करने में बहुत मदद मिलेगी। यह कार्यशाला महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, स्वरोजगार को बढ़ावा देने और ग्रामीण विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।


