
No-confidence motion: दरभंगा में लोकतंत्र की जीत हुई है! जिला परिषद अध्यक्ष सीता देवी के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हो गया, जिसके बाद उनकी कुर्सी छिन गई। अब नए अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी।
दरभंगा: दरभंगा जिला परिषद में आज का दिन ऐतिहासिक रहा, जब वर्तमान अध्यक्ष सीता देवी के विरुद्ध लाया गया अविश्वास प्रस्ताव (No-confidence motion) अंबेडकर सभागार, समाहरणालय में आयोजित विशेष बैठक में पारित हो गया। जिला अल्पसंख्यक पदाधिकारी सह प्रभारी डीएम सलीम अख्तर ने बताया कि सीता देवी के खिलाफ इस अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में कुल 26 सदस्य उपस्थित हुए। सभी 26 पार्षदों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जिसके बाद अध्यक्ष सीता देवी को पद छोड़ना पड़ा।
अध्यक्ष की कुर्सी गिरी: No-confidence motion का असर
निर्धारित समय के अनुसार सुबह 11 बजे बैठक शुरू होनी थी, लेकिन नियमानुसार एक घंटे तक इंतजार किया गया। मात्र 26 पार्षदों की उपस्थिति में ही बैठक प्रारंभ करनी पड़ी, जो यह दर्शाता है कि अध्यक्ष के प्रति सदस्यों का विश्वास पूरी तरह समाप्त हो चुका था। सभी 26 पार्षदों ने एकजुट होकर अध्यक्ष के विरुद्ध मतदान किया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि वर्तमान नेतृत्व पूरी तरह विफल साबित हुआ है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। अगले अध्यक्ष के चुनाव के लिए आयोग को सूचना दी जाएगी और अगली तिथि निर्धारित होने के बाद ही चुनाव संपन्न होगा।
पार्षदों के गंभीर आरोप और मनमानी का दौर
चर्चा के दौरान पार्षदों ने अध्यक्ष पर तीखे शब्दों में कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि अध्यक्ष का कार्यकाल पूरी तरह से मनमानी, प्रशासनिक अराजकता और जवाबदेही से बचने का उदाहरण बन गया था, जिससे जनहित के कार्य बुरी तरह प्रभावित हुए। प्रमुख आरोप इस प्रकार थे:
- पंचायती राज अधिनियम की खुलेआम अवहेलना की गई।
- नियमित बैठकों को जानबूझकर टाला गया।
- विकास योजनाओं के वितरण में पक्षपात और अपारदर्शिता बरती गई।
- दरभंगा में परिषद की संस्थागत गरिमा को लगातार क्षति पहुँचाई गई।
यह निर्णय किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि जनहित को प्राथमिकता देने के लिए लिया गया एक आवश्यक कदम था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
जनहित में लिया गया बड़ा फैसला
बैठक में प्रमुख रूप से उपस्थित पार्षदों में रेणु देवी, काजल कुमारी, रिंकी कुमारी, दिनेश राम, सुलेखा देवी, ललित पासवान, अमरनाथ शर्मा, मो. शुभान, कुलसुम बेगम, धीरेंद्र मिश्र उर्फ शीतल, अवधेश कुमार, सागर नवदिया, हरिमोहन यादव, अजय यादव, नंदकिशोर झा बेचन, धीरज कुमार झा, अमित ठाकुर, आशा देवी, सीमा कुमारी, समता देवी, सुजाता कुमारी, मुसरत फातिमा, नादिरा हुसैन, विभा देवी, ओमप्रकाश ठाकुर और दिलीप यादव सहित कुल 26 सदस्य शामिल थे। इन सभी सदस्यों ने एकजुट होकर जनता के हित में यह बड़ा फैसला लिया, ताकि क्षेत्र की कार्यप्रणाली में सुधार हो सके और विकास कार्यों को गति मिल सके।






