Darbhanga News: दरभंगा जिला बार एसोसिएशन भवन में शनिवार को वकीलों ने एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर उन्होंने महान क्रांतिकारी गणेश दामोदर सावरकर उर्फ बाबाराव सावरकर की जयंती मनाई। वकीलों ने देश की आजादी के लिए उनके संघर्ष और बलिदान को याद किया।
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क्रांतिकारी बाबाराव सावरकर: एक परिचय
गणेश दामोदर सावरकर, जिन्हें बाबाराव सावरकर के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक ऐसे नायक थे, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी देश की आजादी के लिए समर्पित कर दी। उनका जन्म 13 जून 1879 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के भगूर गांव में हुआ था। वे प्रसिद्ध स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर के बड़े भाई थे और उनसे पहले ही क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय हो गए थे।
बाबाराव ने अपने छोटे भाई विनायक दामोदर सावरकर के साथ मिलकर राष्ट्रवाद की भावना को जन-जन तक पहुँचाने का काम किया। उन्होंने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जैसे बड़े नेताओं से प्रेरणा ली और नासिक को ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना दिया। उनका जीवन त्याग, देशभक्ति और अदम्य साहस का प्रतीक है।
राष्ट्रभक्ति की अलख जगाने वाले नायक
बाबाराव सावरकर ने युवाओं और महिलाओं को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने के लिए कई संगठनों की स्थापना की। उन्होंने छात्रों के लिए ‘मित्र समाज’ और महिलाओं के लिए ‘युवती आत्मनिष्ठ संगठन’ जैसे मंच बनाए। इन संगठनों के माध्यम से उन्होंने स्वदेशी उत्पादों के प्रचार और स्वतंत्रता आंदोलन में आम जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया। उनका मानना था कि जब तक समाज के सभी वर्ग एकजुट नहीं होंगे, तब तक अंग्रेजों को देश से बाहर निकालना मुश्किल होगा।
उन्होंने नासिक को क्रांति का गढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी प्रेरणा से ही नासिक में युवा क्रांतिकारी एकजुट हुए और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आवाज बुलंद की। उनके प्रयासों ने युवाओं में राष्ट्रभक्ति की अलख जगाई और उन्हें देश के लिए कुछ कर गुजरने के लिए प्रेरित किया। ऐसे ही Freedom Fighter News आज भी हमें प्रेरणा देती हैं।
कालापानी की सजा और उनका अदम्य साहस
बाबाराव सावरकर की सक्रियता ब्रिटिश सरकार की नजरों में खटकने लगी। उनकी क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण उन्हें 1909 में गिरफ्तार कर लिया गया। अंग्रेजों ने उन्हें 1909 से 1921 तक ‘कालापानी’ की कठोर सजा दी, जो उस समय सबसे क्रूर दंड मानी जाती थी। अंडमान की सेलुलर जेल में उन्होंने अमानवीय यातनाएं सहीं, लेकिन उनकी राष्ट्रभक्ति और आजादी के प्रति उनका संकल्प कभी कमजोर नहीं पड़ा। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी देश की स्वतंत्रता के लिए समर्पित कर दी, जिसका परिणाम हम आज एक स्वतंत्र भारत के रूप में देख रहे हैं।
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जयंती समारोह में वकीलों ने किया नमन
दरभंगा में आयोजित इस जयंती कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिवक्ता रमणजी चौधरी ने की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अधिवक्ता अरुण कुमार चौधरी ने बाबाराव सावरकर के महान व्यक्तित्व और उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाबाराव एक महान क्रांतिकारी थे, जिन्होंने लोकमान्य तिलक सहित कई नेताओं को नासिक आमंत्रित कर राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन को गति दी। अरुण कुमार चौधरी ने उनके द्वारा स्थापित ‘मित्र समाज’ और ‘युवती आत्मनिष्ठ संगठन’ की भी चर्चा की, जिन्होंने स्वदेशी के प्रचार और स्वतंत्रता आंदोलन में जनभागीदारी सुनिश्चित की।
इस अवसर पर अधिवक्ता वीरेन्द्र कुमार सिंह, किरण कुमारी, प्रदीप यादव, पंकज कुमार सिंह, संतोष कुमार सिन्हा, श्याम कुमार झा और शशिभूषण प्रसाद सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। आरटीआई कार्यकर्ता प्रेमनाथ सिंह और अधिवक्ता लिपिक विनय कुमार झा, मुरारी यादव ने भी कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सभी उपस्थित वकीलों ने बाबाराव सावरकर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और देश की स्वतंत्रता के लिए उनके अनवरत संघर्ष को नमन किया।
ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों की जयंती मनाना हमें उनके त्याग और बलिदान की याद दिलाता है। यह हमें यह भी सिखाता है कि किस प्रकार एक व्यक्ति अपने दृढ़ संकल्प और साहस से देश के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है। उनकी गाथाएं आज भी हमें अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देती हैं।
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