

CM Law College Darbhanga: ज्ञान की जिस देहरी पर कभी 320 दीपक एक साथ जलते थे, आज वहां महज 60 की टिमटिमाहट बाकी है। मिथिला के ऐतिहासिक सीएम लॉ कॉलेज की अस्मिता और भविष्य पर मंडराते संकट के खिलाफ अब दरभंगा के अधिवक्ताओं ने निर्णायक संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है। दो महीने तक अपनी मांगों पर कोई कार्रवाई न होने से आहत वकीलों ने अब सूचना का अधिकार (RTI) का सहारा लेकर प्रशासन से जवाब मांगा है।
CM Law College Darbhanga की गरिमा बचाने की जंग
जिला बार एसोसिएशन, दरभंगा के अधिवक्ताओं ने मिथिला के इस प्रतिष्ठित विधि महाविद्यालय की पुरानी शान को बहाल करने के लिए 20 दिसंबर 2025 को बिहार के कुलाधिपति और ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा था। इस ज्ञापन में कॉलेज की समस्याओं और उनके समाधान की मांग स्पष्ट रूप से अंकित थी। लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी जब प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो अधिवक्ताओं का धैर्य जवाब दे गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अब इस मामले में बिहार लोकभवन और कुलपति कार्यालय के लोक सूचना पदाधिकारियों से RTI अधिनियम के तहत जानकारी मांगी गई है कि भेजे गए ज्ञापन पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
क्या है पूरा मामला और क्यों घटा दी गईं सीटें?
इस पूरे विवाद की जड़ कॉलेज में घटाई गई सीटों की संख्या है। बताते चलें कि आजादी से पहले वर्ष 1944-45 में स्थापित इस कॉलेज में बैचलर ऑफ लॉ की पढ़ाई शुरू हुई थी। वर्ष 1971 से लेकर 2010-11 सत्र तक, यहां एलएलबी कोर्स में लगातार 320 छात्रों का नामांकन होता रहा। लेकिन, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा निर्धारित मानकों का पालन न करने के कारण कॉलेज की मान्यता पर संकट आ गया। मानकों के अनुसार, महाविद्यालय में एक पूर्णकालिक विधि डिग्रीधारी प्राचार्य और 11 पूर्णकालिक शिक्षकों का पदस्थापन अनिवार्य है, जिसका अभाव था। इसके अलावा, कक्षाओं के संचालन के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे की भी कमी थी। इन्हीं कारणों से विश्वविद्यालय के इस अंगीभूत कॉलेज में सत्र 2021 से 2024-25 तक छात्रों के नामांकन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी।
लंबे इंतजार और निरीक्षण के बाद, जब सत्र 2025-26 के लिए नामांकन की अनुमति मिली, तो वह भी सशर्त थी। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने 320 सीटों की जगह मात्र 60 छात्रों के नामांकन की अनुमति दी, जिससे मिथिला क्षेत्र के विधि के छात्रों और अधिवक्ताओं में भारी रोष है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह मिथिला के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ज़िम्मेदारी और वकीलों की मांग
अधिवक्ताओं द्वारा भेजे गए स्मारपत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कॉलेज में पूर्णकालिक विधि डिग्रीधारी प्राचार्य, स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति और आवश्यक बुनियादी ढांचे का निर्माण कराना विश्वविद्यालय प्रशासन का नैतिक और कर्तव्यनिष्ठ दायित्व है। उन्होंने कुलाधिपति से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें हैं:
- बीसीआई के मानकों के अनुरूप तत्काल एक पूर्णकालिक प्राचार्य और सभी रिक्त शिक्षक पदों पर स्थायी नियुक्ति की जाए।
- शिक्षण कार्य के लिए आवश्यक भवन और अन्य ढांचागत सुविधाओं का निर्माण कराया जाए।
- कॉलेज की पुरानी गरिमा को बहाल करते हुए पूर्व से स्वीकृत 320 सीटों पर नामांकन का मार्ग फिर से प्रशस्त किया जाए।
इस मांग पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में अधिवक्ता सुधीर कुमार चौधरी, विजय नारायण चौधरी, अनिल कुमार मिश्रा, बुलन कुमार झा, कुमार उत्तम, मुरारी लाल केवट, सनोज कुमार, मनोज कुमार, हीरानंद मिश्रा और संपूर्णानंद झा सहित दर्जनों वकील शामिल हैं, जो इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




