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फ़रवरी, 12, 2026
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दरभंगा महाराजा कामेश्वर सिंह मेमोरियल अस्पताल का मालिक कौन? Sanjay kumar Ray की EXCLUSIVE रिपोर्ट

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संजय कुमार राय, देशज टाइम्स अपराध ब्यूरो प्रमुख, दरभंगा। सवाल यही है, यह दरभंगा के आन-बान का प्रश्न है, आखिर महाराजा कामेश्वर सिंह मेमोरियल अस्पताल किसका है? इसकी जमींन किसकी है? परिसर किसका है? दावा और हकीकत क्या है? कौन सही बोल रहा कौन बोल रहा झूठ? इसका पर्दाफाश होना जरूरी है। कारण, इस परिसर से कई यादें जुड़ी हैं। आइए खबर की ओर…

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दरभंगा महाराजा कामेश्वर सिंह मेमोरियल अस्पताल का मालिक कौन? Sanjay kumar Ray की EXCLUSIVE रिपोर्टदरभंगा आयकर चौराहा पहुंचते ही उसके सटे ठीक आगे महाराजा कामेश्वर सिंह मेमोरियल अस्पताल (Darbhanga Maharaja Kameshwar Singh Memorial Hospital) चल रहा है। जो आयुर्वेदिक कॉलेज का कथित अंश बताया जा रहा है? फंड कहीं और के लिए मिलता है। उसका फायदा कोई और उठा रहा है। यही वजह है, यह काफी दिनों से विवाद में है। यहां कभी भी कोई अप्रिय घटना होने की आशंका है। पढ़िए पूरी खबर

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चार माह पूर्व से ही यहां कुछ ना कुछ अनहोनी की आशंका बन रही है। कारण, उस दौरान सदर एसडीओ ने अस्पताल अधीक्षक डॉ. विनेश्वर प्रसाद से अस्पताल संबंधित कागजातों की मांग की थी। मगर, कागजात रहे तब तो…यहां तो इस अस्पताल के अधीक्षक बिना कोई कागजात के ही पूरे अस्पताल पर दावा ठोक रहे हैं। यह हम नहीं कहते, यहां के लोग कह रहे हैं। इसका साक्ष्य भी देशज टाइम्स के पास है।

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इतना भर ही नहीं। अधीक्षक के पास कोई कागजात नहीं है लेकिन उनका दावा है, और वह कहते हैं कि यह सरकारी जमीन है। इसी के बारे में उनसे चार माह पूर्व ही दरभंगा के वरीय पदाधिकारी ने पूछा था। कहा था, कागज दिखाइए, मगर इन चार महीनों में उन्होंने कोई भी कागजात दिखाना मुनासिब नहीं समझा। ऊपर से कहते हैं कि सरकार इसमें अस्पताल बनाना चाहती है। इसके लिए सरकार ने फंड भी मुहैया करा दिया है। यह फंड भी एक जांच का विषय है। कारण, सरकारी फंड किसे मिल रहा है और लाभ गलत तरीके से कौन उठा रहा है। इसकी भी जांच होनी चाहिए। यह हम नहीं कह रहे। यहां के लोग कह रहे। इसका साक्ष्य देशज टाइम्स के पास है।

दरअसल, गत सोमवार को यह मामला एक बार फिर से उस वक्त तूल पकड़ा जब निरीक्षण के लिए दिल्ली से यहां दरभंगा टीम पहुंची। मगर, इस दिल्ली की टीम को स्थानीय लोंगों ने अस्पताल के अन्य भवनों में घुसने से मना कर दिया। उसे रोक दिया।

स्थानीय लोगों ने उक्त टीम से कहा कि यह जमीन दरभंगा राज परिवार की है। इसमें जबरन अस्पताल चलाया जा रहा है। लोगों ने कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वर्तमान अधीक्षक गलत मंशा पाले बैठे हैं। इस जमीन समेत मकान पर कब्जा जमाना चाह रहे हैं। इसकी त्वरित जांच हो।

इधर, अधीक्षक डॉ. प्रसाद ने कहा कि स्थानीय लोगों की इस हरकत की शिकायत थानाध्यक्ष से करेंगे। सरकार को भी पत्र लिखेंगे। उन्हानें यह भी कहा कि सरकार के सचिव ने दरभंगा के सबसे वरिष्ठ अधिकारी को इस बाबत पत्र भी लिखा है। इसके बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होती।

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यह मामला दूसरे दिन भी फिर गरमा गया। सोमवार के बाद मंगलवार को यह तब तूल पकड़ा जब सोमवार की देर रात अस्पताल के कुछ कर्मियों ने राज परिवार के एक खाली मकान में बेड और बिस्तर लगाकर मकान पर कब्जा करते हुए  अस्पताल का बोर्ड ठोक दिया।

इससे नाराजगी बढ़ गई। वहां रह रहे लोगों को जब पता चला तो इसका विरोध जमकर किया। उक्त स्थल पर थाना पहुंची और जानकारी लेकर वापस हो गई। थानाध्यक्ष ने अधीक्षक से कहा कि जो भी मामला है लिखित में दीजिए। साथ में अस्पताल संबंधित कागजात भी देने का कष्ट कीजिए। समुचित कार्रवाई करेंगे।

थाना के जाने के बाद एक मजिस्ट्रेट भी वहां पहुंचे। मजिस्ट्रेट ने भी अधीक्षक से जमीन के कागजातों की मांग की। लेकिन अधीक्षक महोदय जमीन का कागजात नहीं दे सके।

दरअसल, यह जमीन राज परिवार की है। 14 एकड़ में फैले इस जमीन पर कई असामाजिक तत्वों का जबरन कब्जा है। यह अस्पताल भी उसी 14 एकड़ के अंतर्गत है। वर्ष 2004 तक इस भवन में भारतीय जीवन बीमा निगम का कार्यालय था।

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एलआईसी की ओर से राज परिवार को किराया भी दिया जाता था। बाद में किराया अधिक होने की बात बताकर भारतीय जीवन बीमा निगम ने उक्त भवन को खाली कर दिया। इसके बाद तत्कालीन सिविल सर्जन ने दरभंगा राज को एक पत्र देकर किराए पर इस भवन को देने की बात लिखित में दी। लेकिन, दरभंगा राज ने उक्त भवन को किराए पर नहीं दिया।

कुछ दिनों बाद, कई दर्जन आदमी उस मकान में जबरन घुसकर महाराजाधिराज़ कामेश्वर सिंह अस्पताल का बोर्ड लगा दिया और कब्जा जमा लिया। बार-बार खाली करने की हिदायत राज परिवार से दी गई, लकिन उस भवन को किसी ने खाली नहीं किया।

बताया जा रहा है, महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह मेमोरियल अस्पताल के भूखंड पर मोहनपुर स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल की ओर से बार-बार जबरन कब्ज़ा करने का प्रयास किया जा रहा हैं। इसकी भी जांच होनी चाहिए। कारण, यहां भी मंशा गलत है। राज परिवार की ओर से इस बाबत न्यायालय में मामला TS _ 163/2017 चल रहा है।

अब पढ़िए 4 माह पहले क्या हुआ था…
चार माह पूर्व भी इस मामले को लेकर सदर एसडीओ ने अस्पताल अधीक्षक से अस्पताल संबंधित कागजातों की मांग की थी। लेकिन, अधीक्षक ने अब तक कोई भी कागजात नहीं जमा किया है। ऐसा कई बार हुआ है। इस खाता एवं खेसरा में ही अग्निशामक एवं सर्वे ऑफिस है, जो आज भी किराया राज परिवार के ट्रस्ट को देता है।

राज परिवार के नाम से अब तक जमीन संबंधी राजस्व जमा होते आए हैं। ऐसे में, अस्पताल अधीक्षक की ओर से कैसे सरकार को गुमराह किया जा रहा है। हद यह, बिना जांच-पड़ताल के ही सरकार भी कैसे फंड आवंटित कर देती है? यह बड़ा सवाल है।

अगर सरकार की जमीन है तो सरकार ने जमीन का अधिग्रहण कब किया? मुआवजा की राशि किसको मिली? अगर ऐसा नहीं है तो अस्पताल प्रबंधन की ओर से सरकार और सरकार के बड़े पदाधिकारियों को गुमराह क्यों किया जा रहा है। इसके पीछे क्या वजह है।

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राज दरभंगा के मैनेजर पवन दत्त ने पूछने पर बताया
कि यह राज की जमीन है। अस्पताल में बैठे लोग सरकार समेत स्थानीय पदाधिकारी को गुमराह कर रहें हैं। श्री दत्त ने कहा कि जिला प्रशासन को चाहिए कि दोनों पक्षों को बुलाकर कागजातों की जांच कर निर्णय कर दे। एक दिन में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। यही नहीं, ऐसे दोषियों पर कार्रवाई भी करें, जो सरकार को गुमराह कर रहे हैं।

आपको बता दें, इसी परिसर में दरभंगा राज परिवार की ओर से ट्रस्ट के अधिन महाराजधिराज़ कामेश्वर सिंह अस्पताल है, जो रोगियों का मुफ्त इलाज और दवा भी देती है। इसकी यानी इस अस्पताल की देख-रेख कर रहे राज परिवार के स्टेट मैनेजर प्रिंयांशु झा से भी देशज टाइम्स ने बात की। सुनिए श्री झा ने क्या कहा…

मैनेजर प्रिंयांशु झा ने बताया
अधीक्षक का पुराना इतिहास अगर पुलिस खंगालती है तो इनके चरित्र का पता लग सकता है। इनकी ओर से कभी भी अप्रिय घटना हो सकती है। प्रियांशु ने कहा कि कई और भवन खाली है, उस पर भी अधीक्षक की कौए जैसी नजर है। अगर स्थानीय लोग उग्र हुए तो संभव है कि बड़ी घटना घट सकती है। उसने कहा कि स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि इस मामले का निष्पादन जल्द कर दें।

राज दरभंगा के मैनेजर पवन दत्त ने एक वीडियो उपलब्ध कराया है। इसमें उन्होंने कहा है अस्पताल पर जबरन कब्जा किए जाने के बाद हमलोगों की ओर से मामला न्यायालय में दर्ज कराया गया था। इसका निर्णय अब तक नहीं हो पाया है। मैनेजर श्री दत्त का कहना है कि राज के जमीन पर अनाधिकृत रूप से पांच हजार से अधिक लोग फर्जी कागजात बनाकर रह रहे हैं। इसमें से एक यह भी है।

पूरे मामले को लेकर दरभंगा के डीएसपी कृष्णनंदन प्रसाद से भी बातचीत की गई
डीएसपी कृष्णनंदन प्रसाद ने पूछने पर कहा कि यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर मेरे संज्ञान में आएगा तो निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करेंगे।

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