
Mango Stem Borer: आम की मिठास में कड़वाहट घोलने वाला ‘साइलेंट किलर’ आ चुका है, जो दरभंगा के गौरवशाली बागों की हरियाली पर बड़ा हमला कर रहा है। किसानों की साल भर की मेहनत पर यह कीट पानी फेर सकता है, जिससे वे बेहद चिंतित हैं।
दरभंगा में इन दिनों Mango Stem Borer का खतरा बढ़ गया है। यह जिला, जिसे आम उत्पादन के मामले में एक अग्रणी क्षेत्र माना जाता है, एक गंभीर संकट से जूझ रहा है। जिले के कई ऐतिहासिक आम बागानों में तना छेदक कीट का प्रकोप तेजी से फैल गया है, जिससे हरे-भरे पेड़ सूखने लगे हैं। यह स्थिति न केवल आम की पैदावार को प्रभावित कर रही है, बल्कि उन पारंपरिक प्रजातियों के लिए भी खतरा बन गई है जो पहले से ही बाढ़ और अन्य अजैविक कारकों के कारण विलुप्ति की कगार पर हैं।

क्या है Mango Stem Borer और कैसे पहुंचाता है नुकसान?
कृषि विज्ञान केंद्र के उद्यान वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार विश्वकर्मा के अनुसार, यह कीट आम के पेड़ों के लिए बेहद विनाशकारी है। इसका लार्वा पेड़ के तने या मोटी शाखाओं में छेद करके अंदर घुस जाता है और लकड़ी के भीतर सुरंग बना लेता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह लार्वा पेड़ के संवहनी ऊतकों को खाता है, जिससे पौधों में पोषक तत्वों और पानी का प्रवाह रुक जाता है। परिणामस्वरूप, पेड़ की ऊपरी शाखाएं और पत्तियां सूखने लगती हैं और धीरे-धीरे पूरा पेड़ खत्म हो सकता है।
किसानों के लिए इस कीट के प्रकोप को पहचानना बेहद जरूरी है। इसके मुख्य लक्षणों में पेड़ के तने या शाखाओं पर बने छेदों से कीट का मल बाहर निकलना और चिपचिपे रस का रिसाव होना शामिल है। इस कीट का लार्वा मांसल, क्रीम रंग का और बिना पैरों वाला होता है, जबकि इसका वयस्क कीट एक धूसर रंग का भृंग (बीटल) होता है, जिसके शरीर पर दो गुलाबी बिंदु इसकी खास पहचान हैं। एक प्रभावी कीट प्रबंधन रणनीति के बिना इससे निपटना मुश्किल है।
वैज्ञानिकों ने सुझाए कीट नियंत्रण के प्रभावी तरीके
डॉ. विश्वकर्मा ने किसानों को तत्काल कदम उठाने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि रोकथाम के लिए सबसे पहले पेड़ की प्रभावित और सूखी हुई शाखाओं को काटकर तुरंत नष्ट कर दें। पेड़ के तने पर मौजूद ढीली छाल को खुरचकर साफ करें और उस पर कोलतार व केरोसिन का मिश्रण या कार्बैरिल घोल का लेप लगाएं, ताकि कीट अंडे न दे सकें। यह एक पारंपरिक लेकिन कारगर उपाय है।
रासायनिक नियंत्रण के लिए, प्रत्येक छेद को साफ करके उसमें सेल्फोस की एक टैबलेट या कार्बोफ्यूरान (3जी) के कुछ दाने डालकर उसे गीली मिट्टी से अच्छी तरह बंद कर दें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इससे सुरंग के अंदर मौजूद लार्वा मर जाएगा। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने बागानों का नियमित रूप से निरीक्षण करते रहें और लक्षण दिखते ही तुरंत कार्रवाई करें। सही समय पर किया गया उपचार ही बागानों को इस गंभीर खतरे से बचा सकता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।






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