Darbhanga Matri Suraksha News: दरभंगा के केवटी प्रखंड में प्रधानमंत्री मातृ सुरक्षा अभियान के दस साल पूरे होने पर एक विशेष मातृ सुरक्षा मेला आयोजित किया गया। इस दौरान सैकड़ों गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच की गई, जिसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। स्वास्थ्य विभाग ने इस अभियान को मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
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मंगलवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) केवटी और इसके अधीन आने वाले सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों व स्वास्थ्य उपकेंद्रों (एचएससी) पर यह मातृ सुरक्षा मेला आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. निर्मल कुमार लाल ने की, जिन्होंने अभियान के महत्व पर प्रकाश डाला।
विशेष जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
इस विशेष अभियान के तहत पूरे प्रखंड क्षेत्र में कुल 356 गर्भवती महिलाओं की विस्तृत स्वास्थ्य जांच की गई। इन जांचों के परिणामस्वरूप 18 महिलाओं को उच्च जोखिम (हाई रिस्क) गर्भावस्था की श्रेणी में चिन्हित किया गया, जिससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। यह आंकड़ा क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती चिंता को दर्शाता है।
जांच के दौरान दो गर्भवती महिलाएं ऐसी भी पाई गईं जिनकी स्थिति गंभीर रूप से उच्च जोखिम वाली थी। उन्हें तत्काल बेहतर और विशेष चिकित्सीय सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर कर दिया गया, ताकि उनकी जान बचाई जा सके। यह त्वरित कार्रवाई गंभीर मामलों में जीवन बचाने के लिए महत्वपूर्ण है।
अन्य चिन्हित उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को आवश्यक उपचार और स्थिरीकरण (स्टेबिलाइजेशन) प्रदान किया गया। उन्हें जरूरी दवाएं देकर नियमित चिकित्सकीय परामर्श के साथ घर भेजा गया। स्वास्थ्य विभाग ने इन सभी महिलाओं की विशेष निगरानी सुनिश्चित करने का भी आश्वासन दिया है, ताकि उनकी स्थिति में सुधार हो सके।
अभियान का उद्देश्य और स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र केवटी में लगे मेले में डॉ. अजय कुमार, डॉ. दिलीप कुमार और डॉ. अंजनी कुमारी जैसे अनुभवी चिकित्सकों ने गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच, परामर्श और उपचार का कार्य कुशलता से संभाला। उन्होंने सुनिश्चित किया कि प्रत्येक महिला को उचित देखभाल मिले। वहीं, अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर पदस्थापित चिकित्सकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में जांच कार्य संपन्न कराया।
जिन आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में चिकित्सक उपलब्ध नहीं थे, वहां सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) के नेतृत्व में जांच और परामर्श सेवाएं सफलतापूर्वक प्रदान की गईं। यह सुनिश्चित किया गया कि कोई भी गर्भवती महिला स्वास्थ्य जांच से वंचित न रहे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ी है। यह देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें Keoti Health News के लिए एक सकारात्मक कदम है।
इस अवसर पर स्वास्थ्यकर्मियों ने गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व, नियमित प्रसव पूर्व जांच, संतुलित आहार, संस्थागत प्रसव और गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तृत जानकारी देकर जागरूक किया। यह जानकारी मां और शिशु दोनों के स्वस्थ जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सुरक्षित मातृत्व की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है। साथ ही, प्रत्येक गर्भवती महिला को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना भी इस अभियान का एक अहम लक्ष्य है, ताकि स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके और कोई भी मां या बच्चा असमय काल का ग्रास न बने।
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. निर्मल कुमार लाल ने बताया कि प्रधानमंत्री मातृ सुरक्षा अभियान गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि इस अभियान के माध्यम से उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की समय रहते पहचान कर सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे कई जिंदगियां बचाई जा रही हैं।
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स्वास्थ्य विभाग का यह प्रयास दर्शाता है कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे मेले गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों के लिए संजीवनी का काम करते हैं, जिससे उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सहायता समय पर मिल पाती है।







