
दरभंगा से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर आ रही है। यहां लनामिवि प्रशासन ने छात्रों के साथ बड़ा खिलवाड़ किया है। छात्रों का नंबर वेबसाइट पर शेयर कर दिया गया है। इससे छात्रों को अब अंजान कॉल आने लगे हैं। इसको लेकर मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने विवि प्रशासन पर बड़ा हमला बोला है। एमएसयू ने मिथिला विश्वविद्यालय की कार्यशैली पर सवाल उठाते अधिकारियों को आड़े हाथ लिया है। कहा है, एजेंसी और पदाधिकारी पर सीधी कार्रवाई हो। पढ़िए पूरी खबर
मिथिला स्टूडेंट यूनियन के विश्वविद्यालय के छात्र नेता अमन सक्सेना ने
विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर एक बार फिर से सवाल उठाया है। कहा, विश्वविद्यालय प्रशासन बिना सोचे समझें कुछ भी कर देता है। इसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ता है। छात्र नेता अमन सक्सेना ने कहा, पीजी 19-21 के जिन छात्रों ने नामांकन के लिए अप्लाई किया था, वैसे छात्रों का शनिवार का प्रोविशनल लिस्ट निकाला गया।

इसके साथ छात्र-छात्राओं का मोबाइल नंबर भी शेयर कर दिया गया है। इसके बाद कई छात्र-छात्राओं को अनजान नंबर से फोन कॉल और मैसेज आना शुरू होगा गया है। इससे छात्र काफी परेशान हैं।

तन्नू जायसवाल ने बताया
कॉमर्स में नामांकन के लिए अप्लाई की तन्नू जायसवाल ने बताया कि रात के 12 बजे से सुबह तक कई लोगों का फ़ोन आना शुरू हो गया था। समझ नहीं आ रहा था, ये हो क्या रहा है। फिर पता चला मिथिला विश्वविद्यालय की ओर से जो प्रोविजीनल लिस्ट निकाला गया है, उसमें छात्रों का नंबर भी शेयर कर दिया गया है।
प्राचीन इतिहास की छात्रा सोनम कुमारी ने कहा
कल शाम से ही अंजाने नंबरो से मुझे फ़ोन आना और व्हाट्सप्प मैसेज आना शुरू हो गया है। इससे में परेशान हो चुकी हूं। समझ नहीं आ रहा है, अब करूं तो क्या।
इस बाबत रविवार को छात्र नेता अमन सक्सेना ने डीएसडब्लू विजय कुमार यादव से फ़ोन पर बात कर इस बात की सूचना पदाधिकारी को दी तो पहले पदाधिकारी नंबर शेयर करने की बात करने से इंकार करने लगे।
कहने लगे छात्रों को नंबर शेयर क्यों किया जाएगा। जब देखा गया नंबर शेयर किया जा चुका है तो अब वेबसाइट से नंबर हटाने की बात कर रहे हैं।
अमन ने कहा विश्वविद्यालय में कुछ भी किया जाता हैं तो सोच-समझ कर क्यों नहीं किया जाता है। छात्रों का नंबर इस तरह से सभी के लिए खोल देना ये छात्रों को परेशान नहीं तो और क्या किया जा रहा है।
मोबाइल नंबर हर किसी से शेयर नहीं किया जा सकता हैं, लेकिन विश्वविद्यालय की एक गलती ने हजारों छात्रों का नंबर वेबसाइट पर डालने का काम कर दिया है।
इस बात की खबर डीएसडब्लू तक को नहीं होता है। मोबाइल नंबर कितना महत्वपूर्ण चीज हैं क्या यह विश्वविद्यालय को मालुम नहीं हैं क्या एजेंसी को पता नहीं है कि छात्रों का नंबर शेयर नहीं किया जा सकता है। अगर मालूम नहीं है तो ऐसे पदाधिकारी और ऐसी एजेंसी को विश्वविद्यालय में होने का कोई औचित्य नहीं बनता है।
ऐसे पदाधिकारी और एजेंसी को तुरंत हटा देना चाहिए। छात्र-छात्राओं की परेशानी की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या छात्र छात्राओं को विश्वविद्यालय के इस गलती के कारण मोबाइल नंबर बदलना पड़ेगाञ अब छात्र नंबर बदले भी तो कैसे किसी का नंबर बैंक में है। किसी का आधार में किसी का जॉब में।
यह छात्रों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का काम है। इसकी जिम्मेवारी कोई लेने वाला नहीं है। गलती देखते हुए विश्वविद्यालय ने सभी छात्रों का नंबर वेबसाइट से हटाने की बात कर रहे हैं। जिस काम को पहले सोच समझ करना चाहिए उसे समस्या आने पर किया जा रहा हैञ
कारण यह है कि जो भी लोग पद पर बैठे हैं उनको मालूम ही नहीं होता है, छात्र-छात्राओं की समस्या क्या है। बस ये लोग पद पर इसका शोभा बढ़ाते हैं, लेकिन छात्र हित की बात नहीं करते हैं।
अगर जल्द समस्या का समाधान नहीं होता है। अनजाने नंबर से फ़ोन आने पर विश्वविद्यालय वैसे व्यक्ति पर कार्रवाई नहीं करता है तो हम इसके लिए विरोध को तैयार रहेंगे। आखिर इतने बड़ी संस्था मिथिला विश्वविद्यालय यह गलती कैसे कर सकता है। अगर विश्वविद्यालय ने गलती किया है तो इसे विश्वविद्यालय ही सुलझाये नहीं तो ऐसे लोगों के खिलाफ आंदोलन भी शुरू किया जाएगा।
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