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जनवरी, 4, 2026

Darbhanga Murder Case: हत्याकांड में नहीं मिली जमानत, 4 आरोपियों की याचिका खारिज, अब होगा सख्त कार्रवाई का सामना!

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Darbhanga Murder Case: न्याय की दहलीज पर इंसाफ का इंतजार, जब गुनाह का साया गहराता है, तब अदालती फैसले ही उम्मीद की किरण बनते हैं।

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Darbhanga Murder Case: हत्याकांड में नहीं मिली जमानत, चार आरोपियों की याचिका खारिज, अब होगा सख्त कार्रवाई का सामना!

Darbhanga Murder Case: दरभंगा न्यायमंडल के प्रधान सत्र न्यायाधीश शिव गोपाल मिश्रा की अदालत ने एक हत्या मामले में सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस जघन्य हत्याकांड में काराधीन दो आरोपियों की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है, जबकि इसी मामले के दो अन्य आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका भी नामंजूर कर दी गई है। इस फैसले से आरोपियों में खौफ कायम है और न्यायपालिका का सख्त रुख स्पष्ट हुआ है।

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पीपी अमरेंद्र नारायण झा ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि यह घटना डरहार गाँव के बीबीटोल की है। यहाँ के निवासी एक बुजुर्ग व्यक्ति सूर्य नारायण यादव को कुछ लोगों ने घेरकर ईंट, रॉड और लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा था, जिससे वे गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। इलाज के दौरान दुर्भाग्यवश उनकी मौत हो गई।

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यह भी पढ़ें:  दरभंगा के घनश्यामपुर देउरी में जश्न: अभिषेक मंडल बने चार्टर्ड अकाउंटेंट, मिला गांव के पहले CA बनने का गौरव

सूर्य नारायण यादव के पुत्र राधे कृष्ण यादव के फर्दब्यान के आधार पर बहादुरपुर थाना में कांड संख्या 410/25 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

Darbhanga Murder Case: क्या है पूरा मामला?

इस मामले में स्थानीय डरहार निवासी गणेश कुमार साहू उर्फ गणेश साहू और दीपक कुमार साहू उर्फ भीमा साहू को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इन दोनों ने अपनी नियमित जमानत के लिए याचिका दायर की थी, जिसे प्रधान सत्र न्यायाधीश की अदालत ने आज खारिज कर दिया। वहीं, इसी हत्याकांड के दो अन्य आरोपी, डरहार गाँव के रौशन साह उर्फ रौशन कुमार साहू और गुरु पासवान उर्फ रंजीत कुमार ने भी अदालत में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए आवेदन दिया था। अदालत ने इन दोनों की भी अग्रिम जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया है, जिससे उनकी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।

पीपी श्री झा ने यह भी बताया कि किसी भी जघन्य अपराध के आरोपियों को सिविल कोर्ट के सत्र न्यायाधीश या अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत से जमानत नहीं मिलने पर उनमें भय का माहौल बना रहता है। यह न्याय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जो अपराधियों को यह संदेश देता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह फैसला समाज में अपराध रोकने के लिए एक मिसाल कायम करेगा।

अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज

अदालत के इस कड़े रुख से पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है और यह सुनिश्चित होता है कि कानून अपना काम निष्पक्षता और दृढ़ता से करता रहेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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