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Darbhanga News। कुशेश्वरस्थान में 85 लाख का घोटाला?

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Darbhanga News | प्रखंड के उजुआ सिमरटोका पंचायत में मुखिया भज्जू महतो उर्फ रमेश महतो और पंचायत सचिव दिनेश कुमार चौधरी पर 15वें वित्त आयोग और षष्ठम राज्य वित्त आयोग के तहत विभिन्न योजनाओं में लगभग ₹85,15,941 की अनियमितता और गबन का आरोप लगा है।

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शिकायतकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप

उक्त पंचायत के कोदरा गांव निवासी बाल्मीकि यादव ने बिरौल अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के न्यायालय में आवेदन देकर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।

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आरोपों का ब्योरा

  1. परिवारजनों को वेंडर और लेबर बनाकर गबन:
    • मुखिया के पुत्र विपिन कुमार, जो भोपाल में इंजीनियरिंग के छात्र हैं, के नाम पर महतो ट्रेडर्स संचालित है।
    • विपिन कुमार के खाते में ₹2.5 लाख मजदूरी का भुगतान किया गया।
    • मुखिया के अन्य परिवारजनों जैसे सुशांत कुमार, सुमन कुमार सौरभ, एडिसन कुमार, अक्षय कुमार, और पिंकी कुमारी के नाम पर ₹10 लाख से अधिक की राशि निकासी की गई।
    • इनमें से कई सदस्य छात्र या अन्य कार्यों में संलग्न हैं, लेकिन उन्हें लेबर कार्डधारी दिखाया गया।
  2. सार्वजनिक योजनाओं में हेरफेर:
    • सार्वजनिक शौचालय निर्माण:
      • लगभग ₹80 लाख खर्च दिखाया गया।
      • इनमें से ₹50 लाख मुखिया पुत्र के प्रतिष्ठान महतो ट्रेडर्स को स्थानांतरित किए गए।
      • शौचालय पंचायत के आम स्थानों पर बनाने के बजाय मुखिया और उनके चहेतों की निजी जमीन पर बनाए गए।
    • स्ट्रीट लाइट योजना:
      • 196 स्ट्रीट लाइट के लिए ₹17 लाख की निकासी हुई, लेकिन इतनी संख्या में लाइट लगाई ही नहीं गई।
      • जो लाइट लगाई गई, उनकी बाजार कीमत महज ₹1,500-₹2,000 है।
    • जिम निर्माण:
      • तीन जिम के लिए ₹15 लाख की निकासी हुई।
      • इनमें से एक जिम मुखिया ने अपने आवास पर स्थापित किया।

अन्य आरोप

  • महतो ट्रेडर्स फर्जी जीएसटी नंबर के माध्यम से संचालित है।
  • पंचायत सचिव और मुखिया ने मिलकर योजनाओं की राशि का उठाव अपने लाभ के लिए किया।

प्रशासनिक कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ता ने मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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दोषियों का पक्ष

मुखिया और पंचायत सचिव ने शिकायत पर टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि शिकायत में जो नाम दिए गए हैं, उनसे संपर्क किया जाए।

निष्कर्ष

यह मामला पंचायतीराज अधिनियम के उल्लंघन और सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण है। यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह न केवल प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार के बढ़ते प्रभाव को भी उजागर करता है।

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