दरभंगा न्यूज़: राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। शनिवार को दरभंगा के कतरौल-बसंत पंचायत में जन वितरण प्रणाली (PDS) की दुकानों की ऑनलाइन जांच की गई, जिसने क्षेत्र में नई चर्चा छेड़ दी है। आखिर क्या है इस जांच का मकसद और किन दुकानों पर पड़ी अधिकारियों की नजर?
ऑनलाइन जांच: एक अहम कदम
मिली जानकारी के अनुसार, सहायक जिला आपूर्ति अधिकारी राजन कुमार ने शनिवार को कतरौल-बसंत पंचायत के तीन जन वितरण विक्रेताओं की दुकानों की ऑनलाइन पड़ताल की। इस प्रक्रिया के माध्यम से दुकानों में स्टॉक, वितरण रिकॉर्ड और लाभार्थियों से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों का सत्यापन किया गया। यह कदम डिजिटल माध्यम से कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाने की सरकारी प्रयासों का हिस्सा है।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर बल
जन वितरण प्रणाली (PDS) का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक subsidized दर पर अनाज और अन्य आवश्यक वस्तुएं पहुंचाना है। इस प्रणाली में किसी भी प्रकार की धांधली या अनियमितता सीधे तौर पर लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि सरकारी अधिकारी समय-समय पर इन दुकानों का निरीक्षण करते रहते हैं। ऑनलाइन जांच का प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि अधिकारी बिना किसी पूर्व सूचना के भी कहीं से भी दुकानों की स्थिति की निगरानी कर सकें, जिससे जवाबदेही बढ़ती है।
डिजिटल निगरानी का बढ़ता दायरा
आधुनिक तकनीक का उपयोग अब सरकारी कामकाज में तेजी से बढ़ रहा है। जन वितरण प्रणाली जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं में ऑनलाइन निगरानी भ्रष्टाचार को रोकने और वितरण प्रक्रिया को अधिक सुचारू बनाने में सहायक सिद्ध हो रही है। इस तरह की जांच से न केवल कागजी कार्रवाई कम होती है, बल्कि डेटा की सटीकता भी सुनिश्चित की जा सकती है, जिससे लाभार्थियों को उनका पूरा हक मिल सके। यह भविष्य में ऐसी और भी ऑनलाइन निगरानी का संकेत देता है।



