Patory Murder Case: दरभंगा देशज टाइम्स कोर्ट रिपोर्टर। कानून के हाथ लंबे होते हैं, ये कहावत तो सुनी होगी, लेकिन कभी-कभी इंसाफ की मंजिल तक पहुंचने में दशकों का समय लग जाता है। दरभंगा के बहुचर्चित पटोरी हत्याकांड में 31 साल से अधिक समय के बाद जब अदालत का फैसला आया तो कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिला, जहां न्याय का इंतजार करते-करते कई लोगों की जिंदगी ही खत्म हो गई।
क्या है पूरा Patory Murder Case
यह मामला 8 अगस्त 1994 की शाम का है, जब विशनपुर थाना क्षेत्र के बसंत गांव के पास गुणसार पोखर का इलाका गोलियों की गूंज से दहल उठा था।

वादी के अधिवक्ता चंद्रकांत सिंह
घटना के अनुसार, पटोरी गांव के राम कृपाल चौधरी, रामपुकार चौधरी समेत लगभग एक दर्जन किसान अपने भैंसों को चराकर लौट रहे थे। जब वे गुणसार पोखर में भैंसों को पानी पिला रहे थे, तभी बसंत गांव से कौशर इमाम हासमी समेत 13 नामजद और कई अज्ञात लोग फरसा, भाला और बंदूक जैसे घातक हथियारों से लैस होकर वहां पहुंचे। उन्होंने पशुपालकों को घेर लिया और जबरन उनके मवेशियों को अपने गांव ले जाने की कोशिश करने लगे।
जब पशुपालकों ने इसका विरोध किया, तो हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस गोलीबारी में रामकृपाल चौधरी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि मोहन चौधरी, रविन्दर चौधरी, अशोक चौधरी, कैलाश बिहारी चौधरी, संगीत चौधरी और रामपुकार चौधरी समेत आधा दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसी घटना के संबंध में विशनपुर थाने में कांड संख्या 58/1994 दर्ज किया गया था।
न्याय के इंतजार में बीत गए 3 दशक
इस सनसनीखेज हत्याकांड के मुकदमे को अंतिम फैसले तक पहुंचने में 31 साल, 4 महीने और 28 दिन का लंबा वक्त लग गया। इस लंबी अवधि के दौरान प्राथमिकी में नामजद आधा दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई। यहां तक कि गोली लगने से घायल हुए मोहन चौधरी ने भी न्याय का इंतजार करते-करते दम तोड़ दिया। आखिरकार, अपर सत्र न्यायाधीश सुमन कुमार दिवाकर की अदालत ने सत्रवाद संख्या 326/99 और 320/10 की सुनवाई पूरी की। लंबे इंतजार के बाद आए इस दरभंगा कोर्ट फैसला ने पीड़ित परिवार को एक उम्मीद दी है। अदालत ने अधिवक्ता कौशर इमाम हासमी, अंबर इमाम हासमी, राजा हासमी, मोबिन हासमी और अंजार हासमी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 149 और आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत दोषी करार दिया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
अदालत ने सभी दोषियों के बंधपत्र को खंडित करते हुए उन्हें तत्काल जेल भेज दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सजा की अवधि के निर्धारण के लिए सुनवाई की अगली तिथि 31 जनवरी मुकर्रर की गई है। इस मामले को अंजाम तक पहुंचाने में लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा और एपीपी रेणू झा की सक्रिय भूमिका रही, जिन्होंने पिछले 6 महीनों में सभी गवाहों को अदालत में प्रस्तुत कराया और अभियोजन पक्ष को अपना मामला साबित करने में मदद की।






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