

Mauni Baba: न्याय का तराजू अक्सर तपस्या नहीं, कर्म तौलता है और दरभंगा में एक कथित संत का भविष्य अब इसी तराजू पर टिका है। दरभंगा जिला न्यायमंडल की विशेष अदालत ने चर्चित मौनी बाबा की अग्रिम जमानत याचिका को निष्पादित करते हुए उन्हें आत्मसमर्पण करने का स्पष्ट आदेश सुनाया है।
दरभंगा के पॉक्सो विशेष न्यायाधीश प्रोतिमा परिहार की अदालत ने शुक्रवार को महिला थाना कांड संख्या 182/25 में आरोपी कथित संत राम उदित दास उर्फ Mauni Baba की अग्रिम जमानत याचिका पर यह फैसला सुनाया। अदालत ने दो पालियों में चली मैराथन सुनवाई के बाद बाबा की याचिका को निष्पादित कर दिया और उन्हें अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। इस फैसले के बाद से ही जिले में हलचल तेज हो गई है।
क्या है Mauni Baba से जुड़ा पूरा मामला?
यह पूरा मामला एक नाबालिग लड़की से जुड़ा हुआ है, जिसमें मौनी बाबा पर गंभीर आरोप लगे हैं। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(2), 352, 89, 64(¡) तथा पॉक्सो ऐक्ट की धारा 4/6 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्राथमिकी के अनुसार, आरोपी मौनी बाबा ने नाबालिग पीड़िता की शादी अपने ही भतीजे और शिष्य श्रवण दास उर्फ श्रवण ठाकुर से करा दी थी। यह मामला सामने आने के बाद महिला थाने में केस दर्ज हुआ और पुलिस ने जांच शुरू की। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इस मामले का सह-आरोपी और बाबा का शिष्य श्रवण दास पहले से ही न्यायिक हिरासत में है। उसे 17 जनवरी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था और उसकी जमानत याचिका भी गत 5 फरवरी को पॉक्सो कोर्ट से खारिज हो चुकी है। अब मुख्य आरोपी मौनी बाबा पर भी कानूनी शिकंजा कस गया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
अब आगे क्या करेंगे मौनी बाबा?
अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब कथित संत मौनी बाबा के पास दो ही रास्ते बचे हैं। पहला, वह निचली अदालत के आदेश का पालन करते हुए आत्मसमर्पण कर दें। दूसरा विकल्प यह है कि वह पॉक्सो न्यायालय के इस फैसले को पटना उच्च न्यायालय में चुनौती दें और वहां से राहत की गुहार लगाएं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इस पूरे मामले पर जिले के लोगों की नजरें टिकी हुई हैं। शुक्रवार को फैसले के दिन पॉक्सो कोर्ट के बाहर पीड़ित पक्ष और अभियुक्त पक्ष के लोगों की भारी भीड़ जमा थी, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शा रही थी। अब देखना यह होगा कि मौनी बाबा कानून का सम्मान करते हुए आत्मसमर्पण करते हैं या फिर कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाते हैं।





