

Darbhanga News: विश्वविद्यालय के गलियारों में सन्नाटे को चीरती हुई हंगामे की गूंज सुनाई दी, जहां सिंडिकेट की बैठक चर्चा का मंच कम और विरोध का अखाड़ा ज्यादा बन गई। Darbhanga News की इस रिपोर्ट में जानिए कि कैसे महीनों बाद हुई बैठक में सदस्यों का गुस्सा फूट पड़ा और कई अहम फैसले हवा में लटक गए।
लंबे समय के बाद आयोजित हुई कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय की सिंडिकेट बैठक मंगलवार को सदस्यों के क्षोभ और कड़े प्रतिरोध की गवाह बनी। कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पांडेय की अध्यक्षता में जैसे ही बैठक शुरू हुई, सदस्यों ने पुराने निर्णयों के लागू नहीं होने और बैठक में हो रही देरी को लेकर हंगामा खड़ा कर दिया। बैठक की शुरुआत ही माननीय विधायक प्रो. विनय कुमार चौधरी की आपत्ति से हुई, जिन्होंने इतने लंबे अंतराल पर बैठक बुलाए जाने को लेकर सवाल उठाए।
उनका कहना था कि नियमित बैठकें न होने के कारण विश्वविद्यालय की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं और अभिषद् के सदस्य इन सभी गतिविधियों से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं। उनके इस विरोध का अन्य सदस्यों ने भी पुरजोर समर्थन किया और अपनी नाराजगी व्यक्त की। सदस्यों ने एकमत होकर कहा कि पहले लंबित पड़ी समस्याओं पर चर्चा की जाए, उसके बाद ही एजेंडे के अन्य बिंदुओं पर बात होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Darbhanga News: इन प्रमुख मुद्दों पर गरमाया माहौल
सदस्यों के दबाव के बाद अध्यक्ष की अनुमति से लगभग 15-16 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई, जिन्होंने विश्वविद्यालय की प्रशासनिक सुस्ती की पोल खोल दी। इन मुद्दों में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया भुगतान का मामला सबसे ऊपर रहा। इसके अलावा, नवनियुक्त अध्यापकों के वेतन भुगतान में हो रही देरी, संकायाध्यक्षों और विभागाध्यक्षों के प्रभार सौंपने में विलंब, और प्रोफेसर रेणुका सिन्हा सहित कई सेवानिवृत्त कर्मियों के पेंशन मामलों का न सुलझना भी शामिल था।
बैठक में इस बात पर भी गहरा रोष व्यक्त किया गया कि अनुकंपा पर नियुक्ति का मामला भी अधर में लटका हुआ है। छात्रों से जुड़े मुद्दे जैसे छात्रवृत्ति भुगतान में देरी, शोधार्थियों को अंकपत्र न मिलना और परीक्षा परिणामों में विलंब पर भी सदस्यों ने प्रशासन को घेरा। सदस्यों ने आधुनिक विषयों को पर्याप्त स्थान देने और महिलाओं के लिए गृहविज्ञान जैसे रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू करने की भी मांग उठाई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। महाविद्यालयों में रेशनलाइजेशन के कारण पदों की हानि का मुद्दा भी गरमाया रहा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
बजट पर चर्चा टली, अगली बैठक का इंतजार
इन तमाम ज्वलंत मुद्दों पर हंगामे और लंबी चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया कि इन सभी समस्याओं का शीघ्र कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाए। हंगामे के कारण बैठक के मुख्य एजेंडे में शामिल बजट निर्माण समेत अन्य प्रस्तावों पर चर्चा नहीं हो सकी। इन सभी प्रस्तावों पर विचार के लिए अगली बैठक तक का इंतजार करना होगा।
सदस्यों की नाराजगी पर कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पांडेय ने अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि सभी वित्तीय भुगतान के मामलों में सावधानीपूर्वक और पूरी जांच-पड़ताल के कारण विलंब होता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इन सभी मामलों का जल्द से जल्द निष्पादन करने का प्रयास किया जाएगा। अंत में, कुलपति द्वारा अगली बैठक शीघ्र बुलाने की सूचना और धन्यवाद ज्ञापन के साथ बैठक समाप्त हुई। बैठक में कुलसचिव डॉ. ब्रजेशपति त्रिपाठी, प्रो. पुरेन्द्र वारिक, डॉ. दिलीप कुमार चौधरी, डॉ. अजित चौधरी, डॉ. शिवलोचन झा, डॉ. कुणाल झा, रूदल राय और शकुंतला गुप्ता समेत अन्य सदस्य उपस्थित रहे। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संस्कृत विश्वविद्यालय प्रशासन इन समस्याओं का समाधान कब तक कर पाता है।


