
ज्ञान का मंदिर ही जब कब्रगाह बन जाए तो इंसाफ की कलम को स्याही नहीं, लहू से लिखना पड़ता है। Darbhanga News: दरभंगा के एक बहुचर्चित हत्याकांड में अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। मामला कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, बहेड़ी से जुड़ा है, जहां की तत्कालीन वार्डन ने 7वीं कक्षा की एक मासूम छात्रा को महज इसलिए मौत के घाट उतार दिया क्योंकि उस पर 1000 रुपये चुराने का शक था।
दरभंगा जिला के अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम के विशेष न्यायाधीश शैलेन्द्र कुमार की अदालत ने इस मामले में अहम फैसला सुनाते हुए पटना जिले की पतौना निवासी रेखा सिन्हा को दोषी करार दिया है। अदालत ने बहेड़ी थाना कांड संख्या 326/24 से जुड़े एससी/एसटी वाद संख्या 03/25 की सुनवाई पूरी करते हुए मंगलवार को यह निर्णय दिया। तत्कालीन हॉस्टल वार्डन रेखा सिन्हा को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(5) के तहत दोषी पाया गया है।
दोषसिद्धि के तुरंत बाद अदालत ने दोषी वार्डन का बंधपत्र खंडित कर दिया और उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अब अदालत सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 17 मार्च की तारीख मुकर्रर की है, जिस दिन यह तय होगा कि दोषी रेखा सिन्हा को कितनी सजा मिलेगी।
Darbhanga News: क्या था पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष का संचालन कर रहे विशेष लोक अभियोजक संजीव कुमार कुंवर ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि यह घटना 15 सितंबर 2024 की है। कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, बहेड़ी में पढ़ने वाली पतोर थाना क्षेत्र के श्रीरामपिपरा गांव की सातवीं कक्षा की छात्रा की मौत हो गई थी। इस सनसनीखेज छात्रा की हत्या के बाद मृतका के पिता ने बहेड़ी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
अपनी शिकायत में पिता ने आरोप लगाया था कि हॉस्टल वार्डन रेखा सिन्हा के पर्स से एक हजार रुपये की चोरी हो गई थी, जो बाद में उनकी बेटी के पास से बरामद हुए। इसी बात से नाराज होकर वार्डन ने पूछताछ के दौरान बच्ची को बेरहमी से पीटा और गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी दर्ज की थी।
महज डेढ़ साल के अंदर आया फैसला
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत में तेजी से सुनवाई पूरी की गई। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से मामले के अनुसंधानकर्ता (IO) और पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर समेत कुल 6 गवाहों की गवाही कराई गई। सभी गवाहों के बयान और पेश किए गए सबूतों के आधार पर अदालत इस नतीजे पर पहुंची कि वार्डन ही छात्रा की मौत के लिए जिम्मेदार है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अदालत ने महज एक साल और पांच महीने के रिकॉर्ड समय में इस केस की सुनवाई पूरी करते हुए अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इस फैसले के बाद जिले के लोगों की निगाहें अब 17 मार्च पर टिक गई हैं, जब अदालत दोषी वार्डन की सजा का ऐलान करेगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस मामले ने एक बार फिर छात्रावासों में बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।





