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फ़रवरी, 18, 2026
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Darbhanga News: Digital Media के बवंडर में छपेगा तो बिकेगा ‘ दांव’ पर, राम गोविंद गुप्ता को याद कर बोले जानकार- ‘विश्वसनीयता ही बड़ा ब्रह्मास्त्र’

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Digital Media: खबरों की दुनिया की पुरानी कहावत ‘छपेगा तो बिकेगा’ पर अब स्क्रीन की चकाचौंध ने धूल की मोटी परत चढ़ा दी है। दरभंगा में आयोजित एक संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने इसी बदलते परिदृश्य और पारंपरिक पत्रकारिता की चुनौतियों पर गहन मंथन किया, जहां यह बात प्रमुखता से उभरी कि विश्वसनीयता ही पारंपरिक मीडिया का सबसे बड़ा ब्रह्मास्त्र है।ख्यातिलब्ध पत्रकार स्व. राम गोविन्द प्रसाद गुप्ता जी की 30वीं पुण्यतिथि के अवसर पर “डिजिटल युग में परंपरागत पत्रकारिता की विश्वसनीयता” विषय पर एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें बतौर मुख्य वक्ता, वरिष्ठ पत्रकार सह प्रोफेसर हरि नारायण सिंह ने कहा कि सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के तेज विकास ने समाज के हर पहलू को प्रभावित किया है और पत्रकारिता इसका अपवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि डिजिटल मीडिया ने सूचना के प्रसार को लोकतांत्रिक तो बनाया है, लेकिन इसने पारंपरिक पत्रकारिता की विश्वसनीयता, प्रासंगिकता और आर्थिक स्थिरता पर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।Darbhanga News: Digital Media के बवंडर में छपेगा तो बिकेगा ' दांव' पर, राम गोविंद गुप्ता को याद कर बोले जानकार- 'विश्वसनीयता ही बड़ा ब्रह्मास्त्र'

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Digital Media के दौर में क्यों घट रही विश्वसनीयता?

प्रोफेसर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि फेसबुक, ट्विटर (X), और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स ने सूचना के उत्पादन और वितरण के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। पहले जहां समाचार संगठनों का सूचना पर एकाधिकार था, वहीं अब कोई भी व्यक्ति अपने स्मार्टफोन से एक खबर बनाकर दुनिया भर में फैला सकता है। इस बदलाव ने समाचार चक्र को अत्यधिक तेज कर दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। पहले समाचार अगले दिन अखबारों में छपते थे, लेकिन अब सेकंडों में जानकारी वायरल हो जाती है। इस जल्दबाजी में तथ्यों की जांच और विश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे पत्रकारिता की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ता है।Darbhanga News: Digital Media के बवंडर में छपेगा तो बिकेगा ' दांव' पर, राम गोविंद गुप्ता को याद कर बोले जानकार- 'विश्वसनीयता ही बड़ा ब्रह्मास्त्र'मुख्य अतिथि और दरभंगा अभियंत्रण महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. संदीप तिवारी ने कहा कि किसी भी बड़ी घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर उससे जुड़ी अपुष्ट जानकारी और वीडियो वायरल हो जाते हैं। वहीं, पारंपरिक समाचार संगठन उस जानकारी को सत्यापित करने में समय लेते हैं। इस बीच, जनता सोशल मीडिया की सूचना पर अपनी राय बना चुकी होती है, जिससे पारंपरिक पत्रकारिता की प्रासंगिकता कम होती दिखती है।Darbhanga News: Digital Media के बवंडर में छपेगा तो बिकेगा ' दांव' पर, राम गोविंद गुप्ता को याद कर बोले जानकार- 'विश्वसनीयता ही बड़ा ब्रह्मास्त्र'

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आर्थिक मॉडल और बदलती पाठक रुचि की चुनौती

संगोष्ठी में यह बात भी सामने आई कि डिजिटल युग ने पारंपरिक पत्रकारिता के आर्थिक मॉडल को भी झकझोर दिया है। पहले विज्ञापन और सदस्यता आय के मुख्य स्रोत थे, लेकिन अब अधिकांश विज्ञापन राजस्व गूगल और फेसबुक जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को जा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार रवि भूषण चतुर्वेदी ने विषय प्रवेश करते हुए कहा कि आज के पाठक छोटी, आकर्षक और दृश्यात्मक सामग्री को प्राथमिकता देते हैं। लंबे और विश्लेषणात्मक लेखों की मांग घट रही है। इस बदलते व्यवहार ने समाचार संगठनों को अपनी शैली बदलने पर मजबूर किया है।वरिष्ठ पत्रकार गंगेश मिश्र ने एक अलग दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि पत्रकारिता कभी बूढ़ी नहीं होती, केवल उसका स्वरूप बदलता है। सूचना, उपयोगिता और रोचकता आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “पहले हम खबरों को उल्टा पिरामिड की तरह परोसते थे, आज सीधा पिरामिड की तरह परोसते हैं। यह अंतर बाजारवाद के कारण आया है।” देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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भविष्य की राह: संतुलन और नवाचार

विशेषज्ञों ने माना कि इन चुनौतियों के बावजूद, पारंपरिक पत्रकारिता के पास अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के कई रास्ते हैं। संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार डॉ. कृष्ण कुमार ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलती गलत सूचनाओं को रोकने के लिए पारंपरिक पत्रकारिता को अपनी विश्वसनीयता और मजबूत करनी होगी। इसके लिए तथ्य-जांच इकाइयों की स्थापना और पारदर्शी संपादकीय प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। पत्रकारों को डिजिटल पत्रकारिता, डेटा विश्लेषण और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग जैसे नए कौशल सिखाने की जरूरत है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सतही सामग्री के विपरीत, पारंपरिक पत्रकारिता को खोजी पत्रकारिता और डेटा-आधारित कहानियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जो पाठकों को आकर्षित कर सकती हैं।कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. ए0डी0एन0 सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद गुप्ता ने दिया। कार्यक्रम की शुरुआत में स्व. राम गोविन्द प्रसाद गुप्ता के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। संगोष्ठी का सार यह रहा कि डिजिटल और पारंपरिक पत्रकारिता के बीच एक संतुलित सह-अस्तित्व संभव है, यदि दोनों एक-दूसरे के पूरक बनकर जनता तक सटीक और विश्वसनीय सूचनाएं पहुंचाने के साझा लक्ष्य पर काम करें।

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