
LPG Cylinder: चूल्हे पर चढ़ी हांडी इंतज़ार में है और घर की लक्ष्मी धुएं में खोई है, क्योंकि साहब का फरमान है कि गैस अब 45 दिनों के लंबे इंतजार के बाद ही नसीब होगी। दरभंगा के सिंहवाड़ा प्रखंड में गैस उपभोक्ताओं की स्थिति कुछ ऐसी ही हो गई है, जहां सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का फासला मीलों लंबा नजर आता है। सरकार और प्रशासन जहां गैस की कोई कमी न होने और होम डिलीवरी के दावे कर रहे हैं, वहीं सिंहवाड़ा के ग्रामीणों को एक सिलेंडर भरवाने के लिए डेढ़ महीने का इंतजार करने को मजबूर किया जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
क्या है LPG Cylinder का 45 दिनों वाला नया नियम?
सिंहवाड़ा प्रखंड के उपभोक्ताओं के लिए यह समझना मुश्किल हो रहा है कि आखिर यह नया नियम आया कहां से। आम तौर पर एक परिवार में एक गैस सिलेंडर महीने भर चलता है, लेकिन अब उन्हें अगला सिलेंडर बुक कराने के लिए पूरे 45 दिन इंतजार करना होगा। इसमें डिलीवरी के 4-5 दिन और जोड़ दिए जाएं तो यह अवधि लगभग 50 दिनों की हो जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि बाकी के 15-20 दिन ग्रामीण अपना चूल्हा कैसे जलाएंगे? क्या वे वापस लकड़ी और कोयले के धुएं में जीने को मजबूर हैं? इस Gas Shortage के कारण लोगों में भारी गुस्सा है।
एक पीड़ित उपभोक्ता ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि जब उन्होंने स्थानीय गैस एजेंसी से संपर्क किया, तो उन्हें पहले 20 मार्च के बाद आने को कहा गया। जब उन्होंने 21 मार्च को ऑनलाइन बुकिंग का प्रयास किया, तो उन्हें संदेश मिला कि आपकी अगली बुकिंग 7 अप्रैल के बाद ही संभव है। यह स्थिति केवल एक उपभोक्ता की नहीं, बल्कि पूरे इलाके की है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
प्रशासन के दावों और हकीकत में जमीन-आसमान का फर्क
जब इस गंभीर समस्या के बारे में स्थानीय गैस वितरक से बात की गई, तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 45 दिन के बाद ही बुकिंग का नियम है। यह जवाब प्रशासन के उन दावों की पोल खोलता है, जो हर दिन प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जिले में गैस की सुचारू आपूर्ति और होम डिलीवरी का ढिंढोरा पीटते हैं। शहरी क्षेत्रों की चिंता करने वाला प्रशासन शायद यह भूल गया है कि दरभंगा की एक बड़ी आबादी गांवों में बसती है। इस Gas Shortage ने उज्ज्वला योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के उद्देश्य पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बड़ा सवाल यह है कि अगर गैस की किल्लत नहीं है, तो फिर यह 45 दिनों की ‘लक्ष्मण रेखा’ क्यों खींची गई है? आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। प्रशासन को इस मामले पर तत्काल ध्यान देकर ग्रामीण उपभोक्ताओं को राहत देनी चाहिए।







