Darbhanga Pilgrimage: जीवन की आपाधापी में सुकून की तलाश, जहां आस्था की डगर पर कदम बढ़ते हैं और आत्मा को शांति मिलती है। यही उद्देश्य लेकर, एक अनोखी यात्रा पर निकला है दरभंगा का यह दल।
Darbhanga Pilgrimage News: अध्यात्म और सौहार्द का संगम
दरभंगा तीर्थयात्रा: सौहार्द की मिसाल
दरभंगा पर्यटन संस्थान द्वारा आयोजित 110 सदस्यीय तीर्थयात्रा दल गुरुवार की सुबह विंध्याचल, प्रयागराज में लगने वाले माघी मेले और भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या के लिए रवाना हो गया। यह दल वार्ड 21 के अंतर्गत आता है और 2014 से लगातार ऐसी यात्राओं का आयोजन कर रहा है। संस्थान ने 2014 से ही विभिन्न धार्मिक स्थलों की यात्राओं को सफलतापूर्वक संपन्न कराया है, जिसमें जियारत टीम और तीर्थ यात्रा दल अलग-अलग स्थानों का भ्रमण करते हैं। इस वर्ष नवंबर में होने वाले चुनाव के कारण यह यात्रा जनवरी में आयोजित की जा रही है।

दरभंगा स्टेशन पर मुस्लिम समुदाय के सहयोगियों ने सभी यात्रियों को सफल यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं और उन्हें विदा किया। इस तीर्थयात्रा में मुख्य रूप से महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं, जिनकी सुविधा और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है। यह यात्रा 19 जनवरी को अपने गंतव्य से वापसी करेगी।
इससे पहले, 4 जनवरी से 10 जनवरी तक संस्थान की 75 सदस्यीय जियारत टीम ने देवा शरीफ (बाराबंकी), हजरत निजामुद्दीन (दिल्ली) और अजमेर शरीफ की यात्रा की थी। यह दल 10 जनवरी को सफलतापूर्वक लौट आया था। इस तरह की आध्यात्मिक यात्राएँ समाज में भाईचारे और सद्भाव को भी बढ़ावा देती हैं, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
बुजुर्गों की सुविधा पर विशेष ध्यान
संस्थान की संरक्षक और पूर्व पार्षद मधुबाला सिन्हा ने बताया कि 2014 में शुरू हुई इन यात्राओं के माध्यम से अब तक पांच हजार से अधिक हिंदू और मुस्लिम श्रद्धालु तीर्थयात्रा एवं जियारत कर चुके हैं। सभी यात्राएं यथासंभव ट्रेन द्वारा आयोजित की जाती हैं और इसके लिए दो माह पूर्व ही आरक्षण करा लिया जाता है। यात्रा के प्रबंधन में युवा सहयोगी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चूंकि अधिकतर यात्री बुजुर्ग होते हैं, इसलिए इस संस्थान का गठन विशेष रूप से उनकी यात्रा को सुगम बनाने के लिए किया गया था और यह अब तक अपनी सेवाएँ प्रदान कर रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: मधुबाला सिन्हा ने बताया कि वे सभी यात्राओं में यात्रियों के साथ जाती हैं और उनके साथ ही वापस आती हैं। यात्रियों के भोजन और पानी का विशेष ख्याल रखा जाता है ताकि यात्रा के दौरान उनका स्वास्थ्य प्रतिकूल रूप से प्रभावित न हो। यह एक ऐसा प्रयास है जो लगातार समाज को जोड़ने का काम कर रहा है और आस्था को मजबूत बना रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


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