
मखाना की खेती: मिथिलांचल की पहचान मखाना को लेकर एक अहम कार्यक्रम दरभंगा में हुआ है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग में हुए इस विशेष व्याख्यान में मखाना उत्पादन की नई दिशाओं पर रोशनी डाली गई। यह किसानों और शोधकर्ताओं दोनों के लिए बेहद उपयोगी रहा।
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU), दरभंगा के वनस्पति विज्ञान विभाग ने हाल ही में “सूटेबल इकोक्लाइमेट फॉर सक्सेसफुल कल्टीवेशन ऑफ मेजर इकोनॉमिकल एक्वाटिक क्रॉप्स” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में मखाना अनुसंधान केन्द्र, दरभंगा के निदेशक डॉ. इंदु शेखर सिंह मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने मखाना सहित अन्य उच्च मूल्य वाली जलीय फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए आवश्यक सटीक पर्यावरणीय और जलीय मापदंडों की विस्तृत जानकारी दी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
मखाना की खेती: इको-फ्रेंडली तकनीकों पर जोर
डॉ. सिंह ने विभाग के शोधकर्ताओं को जलभराव वाले क्षेत्रों और स्थानीय तालाबों का उपयोग करके पर्यावरण-अनुकूल तरीके से मखाना की खेती करने की रणनीतियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि कैसे कम लागत और प्रकृति के अनुकूल उपायों से अधिकतम उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से क्षेत्र में पाई जाने वाली स्थानीय जलीय फसलें की उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया।
शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए महत्वपूर्ण अवसर
इस व्याख्यान से वनस्पति विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं, शिक्षकों और छात्रों को मखाना की खेती के भविष्य और इसकी आर्थिक संभावनाओं को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर मिला। डॉ. सिंह की विशेषज्ञता ने सभी उपस्थित लोगों को कृषि के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। यह आयोजन मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।






