
दरभंगा न्यूज़: शिक्षा की अलख जगाने वाले एक संस्थान की दशा अब बदलने वाली है? सालों से बदहाली का शिकार डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम महिला प्रौद्योगिकी संस्थान अब आधुनिकता की राह पर कदम रखेगा। हाल ही में राज्यसभा सांसद डॉ. धर्मशीला गुप्ता ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर इस संस्थान के कायाकल्प के लिए एक खाका पेश किया है, जिसके बाद उम्मीदों का नया सवेरा जागा है।
राज्यसभा सांसद और बिहार प्रदेश महिला मोर्चा, भाजपा की अध्यक्ष डॉ. धर्मशीला गुप्ता ने हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से दिल्ली में मुलाकात की। इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य दरभंगा स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम महिला प्रौद्योगिकी संस्थान (WIT) के आधुनिकीकरण और समग्र विकास के लिए केंद्र सरकार का सहयोग प्राप्त करना था। सांसद गुप्ता ने संस्थान की वर्तमान स्थिति और उसकी भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की, जिससे इस क्षेत्र में महिला शिक्षा को नई दिशा मिल सके।
संस्थान की बदहाली और महत्व
डॉ. गुप्ता ने मंत्री को बताया कि यह संस्थान उत्तर-पूर्व भारत की महिलाओं को तकनीकी शिक्षा प्रदान करने और उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इसकी स्थापना वर्ष 2004 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संयुक्त प्रयासों से हुई थी। इसके बावजूद, लगभग दो दशक बीत जाने के बाद भी यह संस्थान बुनियादी ढांचे की कमी और जर्जर भवनों की समस्याओं से जूझ रहा है। अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करने में यह अभी तक सफल नहीं हो पाया है, जिसका सीधा असर यहां की छात्राओं की शिक्षा पर पड़ रहा है।
यह संस्थान क्षेत्र की हजारों लड़कियों के लिए तकनीकी शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है, बशर्ते इसे उचित सहयोग और संसाधन मिलें। सांसद डॉ. गुप्ता ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के समक्ष संस्थान के पुनरुद्धार के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव और मांगें रखीं, जिनका उद्देश्य इसे एक आधुनिक और अग्रणी तकनीकी शिक्षण केंद्र बनाना है।
आधुनिकीकरण के लिए प्रमुख मांगें
केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मुलाकात के दौरान, डॉ. धर्मशीला गुप्ता ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम महिला प्रौद्योगिकी संस्थान के उत्थान के लिए कई ठोस कदम उठाने का आग्रह किया। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
* संस्थान परिसर में 200 बिस्तरों वाले आधुनिक छात्रावास का निर्माण।
* एक सुसज्जित पुस्तकालय और कैंटीन की स्थापना।
* पर्याप्त पार्किंग सुविधा का विकास।
* छात्राओं के लिए इनडोर स्टेडियम और एक विशाल सभागार का निर्माण।
* आधुनिक तकनीक से लैस प्रयोगशालाओं का विकास ताकि छात्राओं को नवीनतम शिक्षा मिल सके।
* संस्थान की शेष भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना।
* दरभंगा आईटी पार्क में संस्थान की सहभागिता सुनिश्चित करना, जिससे छात्राओं को व्यावहारिक अनुभव और रोजगार के अवसर मिलें।
* छात्राओं की सुविधा के लिए बस सेवा उपलब्ध कराना।
* संस्थान को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने के लिए सोलर पैनल प्रणाली स्थापित करना।
महिलाओं के सुरक्षित भविष्य की आस
डॉ. गुप्ता ने उम्मीद जताई कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इन मांगों पर गंभीरता से विचार करेंगे और इस महिला प्रौद्योगिकी संस्थान के विकास एवं आधुनिकीकरण के लिए त्वरित आवश्यक कदम उठाएंगे। उनके अनुसार, इन प्रयासों से दरभंगा ही नहीं, बल्कि संपूर्ण उत्तर-पूर्व भारत की छात्राओं को सुरक्षित, आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा प्राप्त हो सकेगी, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकेंगी और देश के विकास में अपना योगदान दे सकेंगी।




