




बिरौल देशज टाइम्स डिजिटल डेस्क, Exclusive Report उत्तम सेन गुप्ता। घरेलू रसोई गैस की कीमत फिर पचास रुपए बढ़ गई। अब बिहार में यह करीब एक हजार से लेकर एक हजार पचास के बीच मिलेगा।
ऐसे में, उज्जवला योजना को लेकर बड़ा सवाल
सामने आ रहा है। योजना जब बनीं,लाभार्थियों को लगा उनकी किस्मत बदल गई। अब उन धुंओं से आजादी मिल गई जिससे पूरा घर काला पड़ता। आंखें धुंओं की छटपटाहट से कराह उठती, रो पड़ती। लेकिन, सरकार ने इन सबके चेहरे बदल दिए।
घिनौने चेहरे पर पिता की असली बेटिया है वाराणसी की प्रीति…सच मानो तो मनोरंजन ठाकुर के साथ
अब एक क्लिक पर लाइटर
ऑन, गैस ऑन और भोजन झट से तैयार। मगर, इन्हें नहीं पता था। यह सूरत बहुत जल्द, सपने सरीखे धाराशाई हो जाएंगें, जो हो रहे। रसोई गैस की कीमत जो पहले चार से पांच सौ के बीच थी, बढ़कर सीधा दोगुणा एक हजार के पार चला गया। वह भी अब। आगे भगवान मालिक।

खैर, नैक, नियति के बीच बढ़ती
बेतहाशा कीमत को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्र में लोग पुरानी जुगाड़ टेक्नोलॉजी की ओर फिर तेजी से बढ़ने लगे हैं। यानी लकड़ी और गोयठे का इस्तेमाल फिर से तेजी पर है। गांव-घरों में अचानक से लकड़ी की डिमांड बढ़ गई।
हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में रसोई कार्य
में जलावन का उपयोग लोग पिछले एक वर्षों से कर रहे हैं। मगर, इन एक सालों में ही लोगों का मोह भंग क्या कहें, जेब पर डाका का सवाल जब सामने आया तो लोगों ने उज्जवला में मिले सामान को कपड़ों से ढ़ककर शोभा की वस्तु बनाकर रखना ही मुनासिब समझा।

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इन लोगों का साफ कहना कहना
है कि सरकार की ओर से जब रसोई गैस की सुविधा दी गई थी तब इतनी ज्यादा कीमत नहीं थी। लेकिन, अब बढ़ती बेलगाम कीमत को देखते हुए गरीब परिवार लकड़ी और गोबर से तैयार किए हुए जलावन का उपयोग भोजन पकाने में करना शुरू कर दिया है।
गोबर से गोयठा तैयार कर रही
ग्रामीण महिलाओं के पास जब हकीकत की पड़ताल करने देशज टाइम्स की टीम गई तो महिला शांति देवी, बुघनी देवी, रामपरी सहित कई महिलाओं का कहना था कि आज भी सैकड़ों ऐसे परिवार हैं जिसे एजेंसी की ओर से रसोई गैस का कनेक्शन नहीं मिला है।
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साथ ही दिन प्रतिदिन बढ़ते दाम से गैस सिलेंडर खरीद करना हम लोगों के बस की बात नहीं रही। इसलिए हम लोग अपनी पुरानी पद्धति फिर से अपनाने को मजबूर हैं।
देशज टाइम्स को लोगों ने कहा…फिर उसी युग में लौट चलें
वहीं कैलाश चौधरी, बैद्यनाथ यादव, मनोज कुमार ने देशज टाइम्स को बताया कि सरकार को आम आदमी के उपयोग में आने वाले आवश्यक चीजों के बढ़ते कीमतों पर अंकुश लगाना चाहिए। जो नहीं हो पा रहा है। ऐसे में, मजबूर होकर महिलाओं ने यह फैसला किया कि आ अब फिर से उसी युग में लौट चलें।
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