
Darbhanga Train Accident: जिंदगी की रील बनाने की सनक जब मौत की पटरी पर ले जाए, तो पीछे छूट जाता है केवल मातम और पश्चाताप। दिल्ली से घर लौट रहे एक युवक को यह भारी कीमत चुकानी पड़ी, जब चलती ट्रेन से रील बनाने के चक्कर में उसने अपनी जान गंवा दी।
Darbhanga Train Accident: कब रुकेगा सेल्फी और रील का जुनून?
दिल्ली में अपनी तबियत खराब होने पर इलाज कराने सप्तक्रांति एक्सप्रेस से घर आ रहे टेकटार निवासी सुरेंद्र पासवान के 17 वर्षीय पुत्र विवेक कुमार पासवान की मौत समस्तीपुर-मुजफ्फरपुर रेलखंड पर ढोली स्टेशन के पास ट्रेन से गिरकर हो गई। बताया जा रहा है कि युवक रील बनाने के लिए ट्रेन के पायदान पर लटका हुआ था, तभी एक सिग्नल पोस्ट से टकराने के बाद वह नीचे जमीन पर गिर गया। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलते ही रेल पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए मुजफ्फरपुर भेज दिया। पोस्टमार्टम के उपरांत पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया। बुधवार को शव गांव पहुंचा, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। शव पहुंचने की खबर सुनते ही आसपास के लोग सुरेंद्र पासवान के घर पर इकट्ठा होने लगे। परिजनों के साथ मिलकर अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू की गईं। कुछ देर बाद गांव के श्मशान घाट पर मृतक का अंतिम संस्कार कर दिया गया। यह घटना रेलवे सुरक्षा के गंभीर सवाल खड़े करती है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
एक परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक के घर से चीख-पुकार की आवाजें लगातार आ रही थीं। विवेक की मां लीला देवी अपनी दोनों पुत्रियों कामिनी और खुशबू से लिपटकर बार-बार बेहोश हो रही थीं। कई परिजन उन्हें ढाढस बंधाने की कोशिश कर रहे थे। रुंधे गले से मृतक के पिता सुरेंद्र पासवान ने बताया कि वे पत्नी और चार बच्चों के साथ दिल्ली में मजदूरी करते हैं, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनका आठ लोगों का परिवार है जिसका भरण-पोषण वे और उनके पुत्र विवेक तथा बिट्टू मिलकर करते थे। विवेक की ट्रेन से गिरकर अचानक हुई मौत की सूचना मिली तो वे किसी तरह सपरिवार गांव पहुंचे हैं। इस अप्रत्याशित घटना से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, जिसकी भरपाई नामुमकिन है। यह घटना युवाओं में रेलवे सुरक्षा के प्रति जागरूकता की कमी को भी दर्शाती है।





