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फ़रवरी, 12, 2026
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Darbhanga Train Accident: पंजाब गए थे कमाने, अलीनगर के युवक की ट्रेन से कटकर मौत

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Darbhanga Train Accident: जीवन की गाड़ी जब पटरी से उतरती है, तो कई जिंदगियां भी उसके साथ डगमगा जाती हैं। दरभंगा के अलीनगर में एक ऐसे ही दुर्भाग्यपूर्ण हादसे ने एक परिवार की खुशियों पर ग्रहण लगा दिया।

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Darbhanga Train Accident: अलीनगर के युवक की ट्रेन हादसे में मौत, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

Darbhanga Train Accident: रोजगार की तलाश में गया था युवक, लौटी लाश

बिहार के दरभंगा जिले के अलीनगर प्रखंड स्थित मिर्जापुर गांव में उस वक्त मातम छा गया, जब 27 वर्षीय प्रमोद महतो का शव उनके पैतृक निवास पहुंचा। प्रमोद की असामयिक मृत्यु एक ट्रेन दुर्घटना में हुई, जिसने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है। यह घटना 24 जनवरी को हुई थी, और रविवार को जब उनका पार्थिव शरीर घर पहुंचा, तो परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।

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मृतक प्रमोद महतो अपने पीछे पत्नी चंद्रिका देवी और दो मासूम बेटियों को छोड़ गए हैं। बड़ी बेटी की उम्र लगभग तीन वर्ष है और वह बोलने में असमर्थ है, जबकि छोटी बेटी महज दो वर्ष की है। परिवार इस भीषण त्रासदी से गहरे सदमे में है, और उनका भविष्य अंधकारमय दिख रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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बेहतर भविष्य और रोजगार की तलाश में प्रमोद करीब 15 दिन पहले पंजाब के अमृतसर गए थे। परंतु वहां उन्हें काम नहीं मिला, जिससे निराश होकर वे 23 जनवरी को घर वापसी के लिए निकले थे। नियति को कुछ और ही मंजूर था, 24 जनवरी को रास्ते में ही वे एक दुखद ट्रेन दुर्घटना का शिकार हो गए, और उनकी जीवन लीला समाप्त हो गई। इस युवक की मौत से पूरा गांव स्तब्ध है।

स्थानीय ग्रामीणों ने प्रमोद को एक मिलनसार और मेहनती युवक बताया है। उनकी आकस्मिक मौत से पूरे समाज में गहरा शोक है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए ताकि वे अपनी बेटियों का भरण-पोषण कर सकें और उनके भविष्य को संवार सकें। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

यह हृदय विदारक घटना ने एक बार फिर पलायन और रोजगार की समस्या को उजागर किया है, जिसके चलते बिहार के युवा अक्सर महानगरों की ओर रुख करते हैं और ऐसे हादसों का शिकार हो जाते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

अनाथ हुईं दो मासूम बेटियां, मुआवजे की मांग

यह घटना न केवल प्रमोद के परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए एक बड़ी चेतावनी है। सरकार और स्थानीय प्रशासन को ऐसे परिवारों की मदद के लिए आगे आना चाहिए और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने चाहिए ताकि युवाओं को अपने घर से दूर जाकर जान जोखिम में न डालनी पड़े। प्रमोद का परिवार अब एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ उन्हें हर संभव मदद की आवश्यकता है।

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