
3D Printing: दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (DCE) के 3D प्रिंटिंग प्रोजेक्ट सेंटर में 11 मार्च 2026 को “3D प्रिंटिंग एंड एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी” विषय पर एक महत्वपूर्ण ‘एकेडेमिया-इंडस्ट्री मीट’ का आयोजन किया गया। जिस तरह कुम्हार चाक पर मिट्टी को आकार देता है, ठीक उसी तरह अब तकनीक की दुनिया में प्रिंटर स्याही नहीं, बल्कि भविष्य की वस्तुओं को परत-दर-परत गढ़ रहे हैं। इसी भविष्य की तकनीक पर मंथन के लिए दरभंगा की धरती पर उद्योग और शिक्षा जगत के दिग्गज एक साथ जुटे।
यह कार्यक्रम भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा वित्तपोषित है और इसका क्रियान्वयन सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC), कोलकाता द्वारा दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के सहयोग से किया जा रहा है।
3D Printing में भविष्य की संभावनाएं और अवसर
इस भव्य आयोजन का मुख्य उद्देश्य शिक्षा, उद्योग और स्टार्टअप्स के बीच एक मजबूत सेतु का निर्माण करना था। साथ ही, इंजीनियरिंग के छात्रों और पेशेवरों को Additive Manufacturing जैसी आधुनिक

तकनीकों में उभरते अवसरों के प्रति जागरूक करना भी इसका एक बड़ा लक्ष्य था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के प्राचार्य डॉ. चंदन कुमार ने स्वागत भाषण देते हुए सभी अतिथियों का अभिनंदन किया।

वहीं, C-DAC कोलकाता के मुख्य अन्वेषक और परियोजना प्रमुख श्री असित कुमार सिंह ने अपने मुख्य भाषण में उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकियों के महत्व पर प्रकाश डाला और बताया कि ये तकनीकें भविष्य के उद्योगों को कैसे एक नया आकार दे रही हैं।
उद्योग जगत के दिग्गजों ने साझा किए अपने अनुभव
इस अवसर पर एड्रोइटेक इंफॉर्मेशन सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक विनोद कुमार पांडे, दरभंगा जिला उद्योग केंद्र की महाप्रबंधक सुश्री सुरुचि कुमारी, और मिथिलांचल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री फाउंडेशन के निदेशक मोहन कुमार झा ने भी अपने विचार रखे। इन विशेषज्ञों ने उद्योग-अकादमिक सहयोग, उद्यमिता और क्षेत्रीय औद्योगिक विकास के महत्व पर जोर दिया। उद्घाटन सत्र के दौरान विभिन्न पहलों पर एक ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति भी दिखाई गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इसके बाद प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने वाले छात्रों ने अपनी सीखी हुई प्रैक्टिकल स्किल्स का प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) का भ्रमण भी कराया गया, जहाँ उन्होंने उन्नत तकनीकों का लाइव प्रदर्शन देखा।
तकनीकी सत्रों में हुआ गहन विचार-विमर्श
कार्यक्रम के तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों द्वारा कई महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान दिए गए। इनमें शामिल प्रमुख विषय थे:
- हेल्थकेयर में तकनीक की भूमिका
- आधुनिक विनिर्माण में उद्यमिता और नवाचार
- Additive Manufacturing में कौशल विकास और कार्यबल की तैयारी
- टेक्नोलॉजी में मैटेरियल्स इनोवेशन
इन सत्रों को विनोद कुमार पांडे, आकृति वर्मा (संस्थापक और सीईओ, एकेवी वॉल पुट्टी), डॉ. योगेश कुमार (सहायक प्रोफेसर, एनआईटी पटना), और प्रोफेसर पी. एम. मिश्रा (पूर्व निदेशक, महिला प्रौद्योगिकी संस्थान, दरभंगा) ने संबोधित किया।
पैनल डिस्कशन में भविष्य की रूपरेखा पर मंथन
कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण पैनल डिस्कशन रहा, जिसका विषय था – “विनिर्माण का भविष्य: शिक्षा, उद्योग और स्टार्टअप्स की सहयोगात्मक भूमिका।” इस सत्र का संचालन श्री विनोद कुमार पांडे ने किया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने उभरते ट्रेंड्स, उद्योग की जरूरतों और सहयोग के अवसरों पर विस्तृत चर्चा की।
कार्यक्रम के अंत में एक खुली चर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें वास्तविक दुनिया की चुनौतियों को अकादमिक-उद्योग-स्टार्टअप सहयोग के माध्यम से हल करने पर विचार-विमर्श हुआ। यह कार्यक्रम अकादमिक विशेषज्ञों, उद्योगपतियों, उद्यमियों और छात्रों को एक मंच पर लाने में पूरी तरह सफल रहा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह आयोजन क्षेत्र में नवाचार को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



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