



Maithili language: जैसे आंगन में बच्चों की किलकारी गूंजती है, वैसे ही शिक्षा की शुरुआत मातृभाषा से होनी चाहिए। अब इसी मिठास को मिथिला के स्कूलों में अनिवार्य करने की एक ठोस पहल शुरू हो गई है, जिसकी गूंज देश की संसद तक पहुंच गई है।
दरभंगा से भारतीय जनता पार्टी के सांसद और लोकसभा में पार्टी के सचेतक डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने यह मांग जोरदार तरीके से उठाई है। उन्होंने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान सरकार से आग्रह किया कि मिथिला क्षेत्र में आठवीं कक्षा तक मैथिली की पढ़ाई को अनिवार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि केंद्र की एनडीए सरकार ने हमेशा मैथिली भाषा को ऐतिहासिक सम्मान दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सांसद ने याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने मैथिली को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया था, और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसे सीबीएसई पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया। हाल ही में संविधान का मैथिली में अनुवाद और विमोचन भी किया गया, जो न्यायिक और विधायी कार्यों में इसके समावेश का मार्ग प्रशस्त करता है।
Maithili Language की अनिवार्यता पर क्या कहती है नई शिक्षा नीति?
डॉ. ठाकुर ने कहा कि यह मांग पूरी तरह से केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुरूप है। उन्होंने बताया कि इस नीति में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जहां तक संभव हो, कम से कम कक्षा 5 तक और बेहतर हो कि कक्षा 8 तक शिक्षा का माध्यम मातृभाषा या स्थानीय भाषा होनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि मैथिली भाषा इस मानदंड को हर तरह से पूरा करती है। यह कदम स्थानीय भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि सीबीएसई ने भी बुनियादी और प्रारंभिक स्तर पर घरेलू भाषाओं को बढ़ावा देने का संकल्प लिया है। इसी आलोक में, मिथिला क्षेत्र में आठवीं कक्षा तक मैथिली को अनिवार्य किया जाना न केवल तार्किक है, बल्कि आवश्यक भी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सांसद ने संसद में मजबूती से रखा पक्ष
उन्होंने लोकसभा में कहा कि मैथिली सिर्फ एक बोली नहीं, बल्कि अपनी स्वतंत्र लिपि और समृद्ध पहचान वाली एक प्राचीन भाषा है। देश के कई प्रमुख विश्वविद्यालयों में इसमें उच्चतर अध्ययन होता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। झारखंड में तो इसे द्वितीय राजभाषा का दर्जा भी प्राप्त है। ऐसे में, मिथिला क्षेत्र में, जो इसका उद्गम स्थल है, इसे प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं में अनिवार्य भाषा का दर्जा मिलना ही चाहिए।
यह कदम साढ़े आठ करोड़ से अधिक मैथिली भाषियों के लिए गर्व का विषय होगा और इससे भाषा को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी। सरकार द्वारा इस दिशा में जल्द ही ठोस पहल किए जाने की उम्मीद है।


