
जाले, देशज टाइम्स ब्यूरो। जाले प्रखंड के काजी बहेरा गांव के सर्परक्षक इशारफिल पर्यावरण के सबसे बड़े रक्षक हैं। बात चाहे दरभंगा की करें या फिर संपूर्ण मिथिलांचल की, मधुबनी, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय में कहीं भी बड़ा कोबरा सांप निकलता है तो उसे बचाने पहुंच जाते हैं सांप को रेस्क्यू कर उसे घने जंगल में छोड़ने वाले दरभंगा- जाले के इशारफिल।
बातचीत में देशज टाइम्स (Deshaj Times Exclusive) को इशारफिल ने बताया, सांपों को बचाना हमरा सबसे बड़ा कर्तव्य है। अज्ञानता में लोग सांप को मार देते हैं। हमने सांप को यथा संभव बचाने का बीड़ा उठाया है। सांप को पकड़ कर उसका उचित स्थान हरा-भरा जंगल में छोड़ देता हूं, जहां वह अपनी मर्जी से रह सके।
सर्परक्षक इसरफिल अपनी जान जोखिम में डालकर सांप को बचाने के मुहिम के तहत उत्तर बिहार के दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय आदि जिले के शहर सहित विभिन्न गांवों में पहुंचकर सांप को रेस्क्यू कर उसे घने जंगल में छोड़ देते हैं। सांपों के रक्षक के रूप में आज इशारफिल काफी चर्चित हो गए हैं। जिसने भी सांप दिखने की सूचना दी वह सक्रिय हो, अपने बाइक से बताए पता पर पहुंच कर सांप का रेस्क्यू कर उन्हे जंगल में छोड़ देते हैं। इस मुहिम में वह दो वर्षों से जुटे हैं।
पूरा नाम है मो. इशराफिल। इनकी हिम्मत और संघर्ष की कहानी से हर कोई हतप्रभ है। वह विभिन्न क्षेत्रों में जाकर विशेष रूप से सांप पकड़ने और लोगों को सांप के प्रति अंधविश्वास को लेकर, आम लोगों को जागरूक करते हैं। उन्होंने बताया कि इनके पिता मो. मोइन छोटे किसान हैं। माता शबरूल निशा गृहणी हैं। वह चार भाइयों में सबसे छोटे हैं।
उन्होंने बताया कि सबसे दु:ख तब होता है कि वह सर्पमित्र बनकर पर्यावरण के प्रति हर क्षण सक्रिय रहने तथा तमाम योग्यता होने के बावजूद उन्हें सरकारी स्तर पर अबतक कोई सहयोग व मदद नहीं मिली है। जबकि, उसने विभिन्न क्षेत्र के गांव व शहर के लोगों के आवास तक पहुंचकर आदमी सहित जीवजंतु एवम सांप के जीवन को सुरक्षित कर पर्यावरण की सुरक्षा करते हैं।
उनका कहना है कि आप सांप को कहीं भी देखें तो उसके साथ छेड़छाड़ बिलकुल नहीं करें। बल्कि उन्हें फोन करें और इसकी जानकारी दें। वह यथाशीघ्र घटना स्थल पर पहुंचकर अपने छोटे से यंत्र के साथ बड़े से बड़े सांपों को पकड़कर उसे उसके उचित स्थल तक छोड़ देंगे। वह हर प्रजाति के सांपों को अपने वश में कर आसानी से पकड़ सकेंगे,ताकि एक बड़ी अनहोनी घटना से लोगों को बचाया जा सके।
उन्होंने बताया कि तमाम योग्यता होने के बावजूद उन्हें सरकारी स्तर पर अबतक कोई सहयोग व मदद नहीं किया गया। हालाकि इसके लिए उन्होंने कई बार वन विभाग के कई अधिकारियों से भी संपर्क किया है।
कि इनके पिता मो. मोईन और माता शबरुल निशा और इनके अपने तीनों भाई इनके इस काम का विरोध करते हैं। इनके माता-पिता से जब इशराफिल के सांप मित्र बनाने पर उनके विरोध के संदर्भ में पूछा तो उन्होंने कहा कि आम लोगों के जीवन को सुरक्षित करते हुए सांप पकड़ने का कार्य तो काफी प्रशंसनीय व साहसिक है।
लेकिन, मेरे बेटे के पास शैक्षणिक योग्यता रहने के बावजूद सरकार व वन विभाग की ओर से अब तक कोई सहयोग व मदद नहीं किया गया है, इससे दु:ख होता है। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ लोग सांप रेस्क्यू करने के एवज में इतना काम पैसा देते हैं कि वह उनके घर तक बाइक से आने जाने के पेट्रोल की कीमत भी नही हो पाता। सांप पकड़ने से तो इसकी पूरी जिंदगी तो नहीं कटेगी।
वह आगे कहते हैं,अगर उनके बेटा के साथ कोई अनहोनी घटना अगर होती है तो उसका सहारा छीन जाएगा। इनके माता-पिता का सपना है कि सरकार या वन विभाग इनके पुत्र को स्थायी रूप से किसी पद पर नियुक्त कर ले, जिससे पर्यावरण के साथ साथ मूक निरीह प्राणी पर्यावरण के रक्षक सांप की सुरक्षा हो सके।