

कुशेश्वरस्थान, देशज टाइम्स। कुशेश्वरस्थान शिव मंदिर के इतिहास का शिलापट्ट एवं शुद्ध पेयजल का संयंत्र का लोकार्पण बुधवार को किया गया। पढ़िए प्रशांत कुमार की रिपोर्ट
विधायक अमन भूषण हजारी, मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष सह एसडीओ संजीव कुमार कापड़ एवं डीएसपी मनीष चंद्र चौधरी ने संयुक्त रूप से फीता काट कर किया।
शिव मंदिर के मुख्य द्वार पर लगाए गए शिलापट्ट में मंदिर के महात्म्य, उत्पत्ति एवं मंदिर के निर्माण से संबंधित सभी ऐतिहासिक का जानकारी अंकित किया हुआ है।
वहीं शुद्ध पेयजल का संयंत्र प्राथमिक विद्यालय पोखरभिंडा की शिक्षिका कविता कुमारी के सौजन्य से लगाया गया है।
शिलापट्ट में अंकित मंदिर के इतिहास के संबंध में उल्लेख किया गया है कि त्रेतायुग में भगवान श्री राम के पुत्र कुश के द्वारा यहां शिव लिंग की स्थापना किया गया।
एक दूसरे किंवदंती के अनुसार उसी युग में कुश नाम के एक राक्षस भगवान शिव एवं शक्ति का उपासना कर देवराज इंद्र को जीत लिया और अमरत्व प्राप्त कर लिया।
देवताओं के आग्रह पर ब्रह्मा जी ने त्रिविक्रम भगवान को निर्देश दिया कि कुश राक्षस को पृथ्वी में घुसा कर उस पर शिवलिंग रख दी जाए तो वह बाहर नहीं निकलेगा। कालांतर में वही शिवलिंग को कुशेश्वरस्थान महादेव की संज्ञा दिया गया।
एक अन्य कहानी के अनुसार एक कुश मुनि ने यहां शिव लिंग का स्थापना किया जो कुशेश्वरस्थान नाथ महादेव के नाम से प्रचलित हुआ। वहीं कलियुग में सोलहवीं शताब्दी में यहां कुश का घना जंगल था।
इसी जंगल में एक निश्चित स्थान पर एक कुंवारी बाछी प्रतिदिन दुध गिरा कर चली जाती थी।जिसे देखकर लोगों वहां खुदाई की तो शिवलिंग मिला। उक्त स्थान पर झोपड़ीनुमा मंदिर बनाकर लोग पूजा अर्चना करना शुरू किया। कालांतर में कई श्रद्धालु एवं संस्थाओं द्वारा यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराया।
लोकार्पण समारोह में मंदिर न्यास समिति के सचिव विमल चंद्र खां, कोषाध्यक्ष चंद्रवली प्रसाद यादव, सदस्य ललित नारायण साह, कृष्ण कांत हजारी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।
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