

किसी भी रसूखदार के दबाव में कोई भी पुलिस पदाधिकारी काम नहीं करें। अगर शिकायत मिली तो हम कार्रवाई जरूर करेंगे। यह बात बिहार के डीजीपी एके सिंघल (DGP AK Singhal) ने समाहरणालय स्थित अंबेडकर सभागार में आईजी के अलावे तीनों जिले के एसपी के साथ बैठक के दौरान कहीं।
उन्होंने कहा कि एसआर कांडों का निष्पादन दो महीने के भीतर पुलिस अधिकारियों को कर लेनी चाहिए। अपराधियों में भय दिखाना चाहिए। उन्होंने सभी मौजूद थानेदार और इंस्पेक्टर से सवाल किया कि छह महीनों के दौरान आपने कितने अपराधियों को गिरफ्तार किया। पूछा कि कितने अपराधी पुलिस की डर से सरेंडर किया।
उन्होंने इस बात को कई बार दोहराया। लेकिन किसी पदाधिकारी ने इस बात का उत्तर नहीं दिया। उन्होंने 30 एजेंडों को लेकर बैठक की। लेकिन कुछ एजेंडों पर विस्तृत चर्चा के बाद समय बीतने के कारण प्रेस वार्ता कर दिया।
देशज टाइम्स की ओर से सवाल था कि फुलवारी शरीफ कांड में कुल 23 आरोपी हैं। इसमें 11 संदिग्ध मिथिलांचल के हैं? एक की गिरफ्तारी लखनऊ से हुई। बाकी दस की गिरफ्तारी कब होगी? डीजीपी एस के सिंघल का जवाब था कि इस मामले को एएनआई देख रही है। इसमें एटीएस और बिहार पुलिस भी अपने तरीके से काम कर रही है।
दूसरा सवाल था, कि सरकारी नंबर पर अगर कोई पीड़ित फोन करते हैं तो डीएसपी, इंस्पेक्टर तो फोन उठा लेते है लेकिन थानेदार और जिला के वरीय पदाधिकारी फोन नहीं उठाते हैं? इसपर उनका जवाब था कि ऐसा नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो चिंताजनक बात है। इसे गंभीरता से लिया जाएगा।
तीसरा प्रश्न था कि सर कोई भी पीड़ित थाना में कोई आवेदन देता है तो प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाती उनका जवाब था अब ऐसा नहीं होगा। उन्होंने विधि व्यवस्था के बाबत तीनों जिलों से आए पदाधिकारियों को बारीकी से जानकारी देते हुए कहा कि आप समाज के वह अंग हैं जहां से न्याय व्यवस्था की शुरुआत होती है। बेहतर पुलिस करना आपका धर्म है। लोगों को न्याय मिलेगी तो आपके प्रति विश्वास जागेगा।
अपराधियों के खिलाफ कोई समझौता नहीं करें,और इस मामले में कोई भी दबिश हो उसे दरकिनार करें। बेहतर पुलिसिंग ही हमारी पहचान होगी। समाज के लोग इज्जत करेंगे। उन्होंने कहा कि पेंडिंग केसों में जो बात समझ में नहीं आए तो अपने वरिष्ठ पदाधिकारियों से सुझाव लें। यही नहीं, अपने अधिनस्थ पदाधिकारियों को इससे अवगत कराएं। हमेशा मार्गदर्शन दें ताकि कांडों के निष्पादन में तेजी आए। इस दौरान दरभंगा ,मधुबनी और समस्तीपुर के एसपी के अलावे कुछ डीएसपी, कुछ इंस्पेक्टर और कुछ थानेदार बैठक में शामिल थे।
अब सवाल उठता है कि डीजीपी सिंघल आए और तीनों जिला के पुलिस पदाधिकारियों के साथ बैठक की, लेकिन इसका कितना प्रभाव उनके अधीनस्थ काम कर रहें पदाधिकारियों पर पड़ता है? इस बैठक के बाद अगर उनकी समीक्षा होती है और गलत करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होती है फिर उनमें भी एक भय जरूर बना रहेगा पर ऐसा होता नहीं है।
पीड़ित लोग आवेदन लेकर थाने से लेकर एसएसपी तक गुहार लगाते रहते हैं, लेकिन उनकी कोई सुनता ही नहीं। आईजी स्तर के पदाधिकारी भी उक्त आवेदन पर रुचि दिखाते नहीं हैं। बस संबंधित पदाधिकारी के एक आदेश देकर भेज देते हैं।उस आवेदन पर क्या उसके बाद कोई कार्रवाई भी होती है या नहीं कोई देखने वाला नहीं।
अब ऐसे में फरियादी जाएं तो कहां? आवेदन गलत है वह अनुसंधान का विषय है। दोषी या निर्दोष होना अनुसंधान का विषय है। पर ऐसा नहीं करके कोई भी थानाध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करता है। सरकार की भी बदनामी होती है।
हालांकि, डीजीपी ने आश्वस्त किया कि बेहतर पुलिसिंग की दिशा में काम करना या करवाना हमारी प्राथमिकता है। बता दे कि 11.30 बजे से होने वाली बैठक तीन बजे से शुरू हुई। 5.30 बजे तक खत्म हो गई। सभी पुलिस पदाधिकारी नीयत समय पर पहुंचे थे, लेकिन बहुत देर बाद बैठक की शुरुआत हुई।





