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Darbhanga Medical College में डॉक्टरों की लगेगी ‘स्पेशल क्लास’, अब मौत का असली कारण छिपाना होगा नामुमकिन!

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Darbhanga Medical College: जब सांसे थम जाती हैं, तो कहानी खत्म नहीं होती, बल्कि असली कहानी तो आंकड़ों में शुरू होती है। एक ऐसी कहानी जो देश की स्वास्थ्य नीतियों की दिशा तय करती है, लेकिन अक्सर अधूरे सच के साथ। इसी अधूरेपन को दूर करने के लिए डीएमसी ने एक बड़ी पहल की है।

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Darbhanga Medical College में डॉक्टरों की लगेगी ‘स्पेशल क्लास’, अब मौत का असली कारण छिपाना होगा नामुमकिन!

Darbhanga Medical College: दरभंगा चिकित्सा महाविद्यालय यानी डीएमसी अपने 101वें स्थापना दिवस के अवसर पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन करने जा रहा है। यह कार्यशाला 23 फरवरी 2026 को सुबह 10 बजे से 12 बजे तक ऑडिटोरियम में आयोजित होगी, जिसका संचालन टाटा कैंसर अस्पताल, मुजफ्फरपुर के विशेषज्ञ करेंगे। इस वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य डॉक्टरों को मृत्यु के वास्तविक कारणों को वैज्ञानिक और सटीक तरीके से दर्ज करने का प्रशिक्षण देना है।

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अक्सर यह देखा गया है कि चिकित्सक मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत का कारण “दिल का दौरा पड़ना” या “सांस रुक जाना” लिख देते हैं। हालांकि ये तात्कालिक कारण हो सकते हैं, लेकिन वे उस मूल बीमारी को नहीं दर्शाते जिसके कारण व्यक्ति की मृत्यु हुई, जैसे- कैंसर, टीबी, मधुमेह या कोई अन्य गंभीर हृदय रोग। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जब तक मृत्यु के कारणों का डेटा एकरूपता के साथ दर्ज नहीं किया जाता, तब तक स्वास्थ्य योजनाओं को बनाने में विसंगतियां बनी रहती हैं।

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Darbhanga Medical College में क्यों जरूरी है यह ट्रेनिंग?

किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद डॉक्टर द्वारा जारी किया गया चिकित्सकीय प्रमाण-पत्र यह स्पष्ट करता है कि मौत किस बीमारी की वजह से हुई। इसी डेटा के आधार पर सरकार भविष्य की स्वास्थ्य नीतियां बनाती है। इस वर्कशॉप में डॉक्टरों को रोगों के अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण (ICD-10) के उपयोग के बारे में सिखाया जाएगा। यह प्रणाली विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा विकसित की गई है, जिसमें हर बीमारी के लिए एक विशिष्ट कोड होता है, जिससे डेटा में एकरूपता आती है।

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इस प्रणाली से सरकार को यह सटीक जानकारी मिलती है कि किन बीमारियों से सबसे ज्यादा मौतें हो रही हैं, जिससे उन पर लगाम लगाने के लिए प्रभावी योजनाएं बनाई जा सकें। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का संयोजन यूएससीओडी, एचबीसीएच एवं आर सी के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर डॉ. अएशिक चक्रवर्ती कर रहे हैं। प्रशिक्षण टीम में डॉ. रितेश कुमार ऋतुराज, डॉ. बुरहानुद्दीन कुयामी और डॉ. निशांत कुमार शामिल होंगे, जिसमें डीएमसी के सभी विभागों के चिकित्सक हिस्सा लेंगे।

स्थापना दिवस पर छात्रों ने भी दिखाया हुनर

इससे पहले 22 फरवरी को स्थापना दिवस के तहत पीजी छात्रों के लिए एक साइंटिफिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन प्राचार्य डॉ. यू. सी. झा, डॉ. पी.के. लाल, डॉ. आसिफ शाहनवाज, और डॉ. सुशील कुमार समेत कई वरीय चिकित्सकों ने किया। इस दौरान दो दर्जन से अधिक पीजी छात्रों ने पोस्टर और पेपर प्रेजेंटेशन के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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उसी दिन शाम 4 बजे ‘स्वास्थ्य सेवा में एआई एक वरदान है’ विषय पर एक जोरदार वाद-विवाद प्रतियोगिता भी हुई। इसमें पक्ष और विपक्ष में कुल 11 वक्ताओं ने अपने विचार रखे। पक्ष की ओर से माहिरा खानम को प्रथम, डॉ. भवेश कुमार को द्वितीय और स्निग्धा सिंह को तृतीय स्थान मिला। वहीं विपक्ष में अमन कुमार, दीपा भारती और आरिफ इकबाल क्रमशः पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।

प्रतियोगिता के निर्णायक डॉ. सुशील कुमार ने कहा कि AI मानव का ही निर्माण है और यह हमारी सहायता के लिए है। हम इसे नैतिक और मानवीय संवेदनाओं के साथ प्रशिक्षित करने में सक्षम हैं। वहीं, पर्यवेक्षक डॉ. ओम प्रकाश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि हमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता को खुली छूट देनी चाहिए, लेकिन उसकी कमान इंसानों के हाथ में ही रखनी चाहिए।

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