
शिक्षक एक माली की तरह होता है, जो अपने ज्ञान के पौधों से बच्चों के भविष्य को सींचता है। जब वही माली एक बगिया छोड़ दूसरी में जाता है, तो पुरानी बगिया में उदासी और नई में उम्मीदों की नई कोपलें फूटती हैं।दरभंगा के बिरौल सुपौल बाजार के प्रतिष्ठित प्लस टू ओंकार उच्च विद्यालय में अपनी 16 वर्षों की अनवरत सेवा के बाद माध्यमिक हिंदी शिक्षक दुर्गेश कुमार मिश्रा का स्थानांतरण हो गया है, जिसके बाद विद्यालय परिवार ने उन्हें भावभीनी विदाई दी।
विद्यालय के स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर हुए इस विदाई समारोह में श्री मिश्रा अपने अंतिम कार्य दिवस पर भावुक नजर आए। उनके जाने से बच्चे, अभिभावक और सहकर्मी शिक्षक सभी नम आँखों के साथ विदा हुए। अब उन्हें मधुबनी जिले के बासोपट्टी स्थित प्रोजेक्ट गर्ल्स स्कूल महीनाथपुर में अपनी सेवाएं देनी होंगी।
Teacher Transfer News: भावभीनी विदाई समारोह और एक समर्पित यात्रा का अंत
मधुबनी जिले के फुलपरास निवासी दुर्गेश कुमार मिश्रा वर्षों से मधुबनी से सुपौल बाजार तक प्रतिदिन यात्रा कर अपनी कर्तव्यनिष्ठा और समयपालन की एक मिसाल पेश करते रहे हैं। उनका यह लगन और अनुशासन शिक्षकों के लिए प्रेरणास्रोत रहा है। हिंदी के साथ-साथ संस्कृत विषय पर उनकी मजबूत पकड़ ने विद्यार्थियों को न केवल विषय का ज्ञान दिया, बल्कि उनके व्यक्तित्व पर भी सकारात्मक प्रभाव छोड़ा। अभिभावकों के बीच भी उनकी एक सशक्त और विश्वसनीय छवि बनी हुई थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
कठिन परिस्थितियों में भी विद्यालय और वंचित बच्चों के लिए उनका समर्पण सदैव प्रेरणादायी रहा। अपने छात्र जीवन में गोल्ड मेडलिस्ट रहे श्री मिश्रा की अकादमिक उत्कृष्टता ने उन्हें हमेशा विशिष्ट पहचान दी। विद्यालय से उनके स्थानांतरण की खबर से छात्रों और अभिभावकों में गहरी मायूसी छा गई है। श्री मिश्रा का यह शैक्षणिक योगदान न केवल अकादमिक रहा, बल्कि उन्होंने बच्चों को जीवन मूल्यों की भी शिक्षा दी।
सहकर्मियों और छात्रों की जुबानी, दुर्गेश मिश्रा का योगदान
शिक्षक डॉ. केशव चौधरी, नटवर चौधरी, रवींद्र कुमार सिंह, घनश्याम चौधरी, अरुण सिंह, बलराम टेकरीवाल और नवलेश चौधरी सहित अन्य शिक्षाविदों ने श्री मिश्रा के जाने को विद्यालय के लिए एक बड़ा खालीपन बताया। उन्होंने उनके नए दायित्व के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ व्यक्त कीं। गुरुकुल क्लासेस परिवार की ओर से भी उन्हें मिथिला परंपरा अनुसार पाग-चादर, मोमेंटो और गुलदस्ते भेंट कर स्नेहपूर्ण विदाई दी गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
एक सच्चा शिक्षक जहाँ भी जाता है, अपने कर्मों और व्यवहार से बच्चों के बीच स्थायी स्थान बना लेता है। श्री मिश्रा का मिलनसार स्वभाव, अनुशासन और निष्ठा लंबे समय तक स्मरणीय रहेंगे। उनकी यह यात्रा अनगिनत छात्रों के जीवन को रोशन करती रही है, और यह उम्मीद है कि नई जगह भी वे इसी लगन से अपना शैक्षणिक योगदान देते रहेंगे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




