दरभंगा न्यूज़: खेतों में लहलहाती धान की फसल अब किसानों के लिए बोझ बनती जा रही है। सरकार ने खरीद के लिए दरें तय कर दी हैं, लेकिन प्रखंडों में खरीद केंद्र शांत पड़े हैं। आखिर क्या वजह है कि अन्नदाता को अपनी मेहनत का सही दाम नहीं मिल पा रहा और वह औने-पौने दामों पर अपनी उपज बेचने को मजबूर है?
प्रखंड क्षेत्र की सभी पंचायतों में पैक्स (प्राथमिक कृषि ऋण समितियां) द्वारा धान की खरीद न होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मंडियों में धान बेचने के लिए बैठे किसान खरीद का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। मजबूरन, उन्हें अपनी फसल निजी व्यापारियों को बेहद कम दाम पर बेचनी पड़ रही है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पैक्स की निष्क्रियता से गहराया संकट
किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान बेचने की उनकी उम्मीदें टूट रही हैं। जब पैक्स खरीद नहीं कर रहे हैं, तो उनके पास स्थानीय व्यापारियों को कम कीमतों पर उपज बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। यह स्थिति न केवल किसानों को आर्थिक रूप से कमजोर कर रही है, बल्कि उनमें निराशा भी पैदा कर रही है।
धान की बिक्री में हो रही देरी और कम कीमत मिलने से किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक तरफ उन्हें अपनी अगली फसल की बुवाई के लिए पूंजी की कमी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर उन्हें अपनी मेहनत का उचित मूल्य भी नहीं मिल पा रहा। कई किसान कर्ज लेकर खेती करते हैं, और ऐसे में धान का उचित दाम न मिलना उनके लिए और भी बड़ी समस्या खड़ी कर रहा है।
सरकारी आश्वासन और जमीनी हकीकत
सरकार लगातार किसानों को उनकी फसल का उचित दाम दिलाने का आश्वासन देती रही है, लेकिन प्रखंड स्तर पर पैक्स द्वारा धान खरीद न किए जाने की यह जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़ा करती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले समय में किसानों की आर्थिक स्थिति और बदतर हो सकती है, जिसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर भी पड़ेगा।



